
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मस्तूरी ब्लाक के ग्राम जैतपुर में रहने वाली गरीब और भूमिहीन मजदूर परिवारों की महिलाएं सोमवार को कलेक्टर से मिलने पहुंचे। बुनियादी सुविधाओं से महरूम यह महिलाएं जनपद में गुहार लगा-लगाकर थक-हारकर गांव से, अपनी मांगों को लेकर सीधे बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं, लेकिन उन्हें कलेक्टर के न होने पर मायूस ही लौटना पड़ा।
कलेक्टर कार्यालय पहुंची जैतपुर निवासी 30 वर्षीय जेठिया केंवट पति राजू केंवट, सहित अन्य ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि वे अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रही हैं। उनके पास रहने के लिए कोई पक्का मकान नहीं है और वे जर्जर हो चुके खप्पर के मकान में रहने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि बड़े-बड़े सरकारी दावों के बाद भी इन्हें न तो प्रधानमंत्री आवास का लाभ मिला है और न ही ग्राम पंचायत द्वारा इनके घरों में शौचालय का निर्माण कराया गया है, जिसके कारण गांव की बहु-बेटियों को अब भी खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर होना पड़ता है। अपनी मजबूरी और हक की लड़ाई को लेकर ये ग्रामीण महिलाएं अपनी गोद में छोटे-छोटे बच्चों को थामे तपती धूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंची थीं।
महिलाओं ने कलेक्टर से मिलकर अपनी व्यथा सुनाने के लिए काफी देर तक दफ्तर के बाहर इंतजार किया, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी जब कलेक्टर नहीं पहुंचे तो वे मायूस होकर वापस लौट गईं। इसके साथ ही, महिलाओं ने बताया कि वे पूरी तरह से भूमिहीन हैं और कई बार फार्म भरने के बावजूद उन्हें भूमिहीन मजदूर योजना के तहत भी कोई लाभ नहीं दिया जा रहा है। पंचायत स्तर पर हो रही लगातार उपेक्षा से अब ग्रामीणों का सरकारी दावों से भरोसा उठने लगा है।
ओडीएफ के कागजी दावों के बीच महिलाओं का दर्द
प्रशासन जिले को खुले में शौच मुक्त बताने का ढिंढोरा पीट रहा है, वहीं जैतपुर की यह जमीनी हकीकत दावों की पोल खोलती है। गांव की महिलाओं का साफ कहना है कि कच्चे मकान और शौचालय न होने से उनकी सुरक्षा और सम्मान दोनों दांव पर हैं, लेकिन पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।