
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि विभागीय चार्जशीट निर्धारित समय में कर्मचारी को दी गई है, तो केवल 90 दिन के भीतर निलंबन जारी रखने का आदेश नहीं होने से मूल निलंबन अपने आप समाप्त नहीं होता। हालांकि, लंबे समय तक निलंबन बनाए रखने के लिए सक्षम अधिकारी को समय-समय पर सार्थक और स्वतंत्र समीक्षा करनी होगी।
कोरबा कलेक्टर कार्यालय में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत शिवम सहाय चौहान को 25 मार्च 2022 को निलंबित किया गया था। उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 509(बी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67(ए) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। विभागीय चार्जशीट 20 अप्रैल 2022 को दी गई, लेकिन निलंबन जारी रखने का आदेश 90 दिन के भीतर नहीं आया। लगभग डेढ़ साल बाद, 28 अगस्त 2023 को निलंबन बढ़ाने का आदेश जारी किया गया।
शिवम ने हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में चुनौती दी कि 90 दिन में निलंबन विस्तार आदेश नहीं होने से निलंबन की वैधानिकता समाप्त हो गई। सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के अजय कुमार चौधरी बनाम भारत संघ और हाई कोर्ट के किशोर कुमार मामले का हवाला देते हुए आदेश रद्द कर दिए और कर्मचारी को सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील की। डिप्टी एडवोकेट जनरल प्रसून कुमार भदुड़ी ने तर्क दिया कि अजय कुमार चौधरी का फैसला उस स्थिति से संबंधित था, जब निर्धारित अवधि में चार्जशीट नहीं दी गई हो। इस मामले में चार्जशीट समय पर दी गई थी, इसलिए 90 दिन के भीतर विस्तार आदेश नहीं होने से निलंबन स्वतः समाप्त नहीं हो सकता।
डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(5-ए) का उल्लेख करते हुए कहा कि निलंबन आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा संशोधित या निरस्त किए जाने तक जारी रह सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य को कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबित रखने की अनुमति नहीं है।
सक्षम प्राधिकारी को समय-समय पर सभी प्रासंगिक पहलुओं पर समीक्षा करनी होगी। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच का आदेश रद्द करते हुए राज्य की अपील स्वीकार कर ली और मूल रिट याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को शिवम के लंबे निलंबन की नए सिरे से सार्थक समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।