• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • AI बूटकैंप
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

नंबर प्लेट अलग होने के कारण ट्रायल कोर्ट ने खारिज किया था आवेदन, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पलटा फैसला

हरियाणा से खरीदी गई बलेनो कार के अस्थायी और स्थायी पंजीयन नंबर अलग होने के कारण अंबिकापुर में जब्त वाहन को लेकर हाई कोर्ट ने मालिक सुमित कुमार को बड़ी...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 04:14:44 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 04:14:44 PM (IST)
नंबर प्लेट अलग होने के कारण ट्रायल कोर्ट ने खारिज किया था आवेदन, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पलटा फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

HighLights

  1. हरियाणा से खरीदी गई कार के अस्थायी और स्थायी पंजीयन नंबर अलग होने का था पूरा विवाद।
  2. जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू की अदालत ने वाहन की पहचान और स्वामित्व को सही ठहराया।
  3. थानों में खड़े होकर खराब होने वाले वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हरियाणा से खरीदी गई बलेनो कार अंबिकापुर में पुलिस द्वारा जब्त किए जाने के बाद उसके मालिक सुमित कुमार को हाई कोर्ट से राहत मिली है। वाहन की नंबर प्लेट पर अस्थायी पंजीयन नंबर और बाद में जारी स्थायी पंजीयन नंबर अलग होने के कारण ट्रायल कोर्ट ने कार सुपुर्द करने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए कार मालिक को वाहन सुपुर्द करने का निर्देश दिया है। जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू की अदालत ने छह लाख रुपये के निजी बांड और इतनी ही राशि की सक्षम जमानत की शर्त पर वाहन देने का आदेश दिया।

हाई कोर्ट ने वाहन के दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि सुमित कुमार ने हरियाणा में कार खरीदी थी और डिलीवरी के समय उसे अस्थायी पंजीयन नंबर टी-1125-एचआर-5651-डीबी दिया गया था। बाद में सक्षम पंजीयन प्राधिकारी ने उसी वाहन का स्थायी पंजीयन नंबर एचआर-12-एवाई-4753 जारी किया।


कोर्ट ने माना कि अस्थायी और स्थायी पंजीयन नंबर अलग होना स्वाभाविक रूप से वाहन की पहचान या स्वामित्व पर संदेह का पर्याप्त आधार नहीं है। जब खरीद बिल और दोनों पंजीयन दस्तावेजों से वाहन तथा उसके मालिक की पहचान स्पष्ट हो रही है, तो केवल नंबर प्लेट के आधार पर वाहन की सुपुर्दगी रोकना उचित नहीं है। याचिकाकर्ता सुमित कुमार, पुत्र करमवीर, ग्राम खिड़ीसाथ, तहसील सांपला, थाना आईएमटी, जिला रोहतक, हरियाणा निवासी हैं। उन्होंने हरियाणा में बलेनो कार खरीदी थी। डिलीवरी के समय वाहन पर अस्थायी पंजीयन नंबर दिया गया था।

याचिका में बताया गया कि हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट जारी होने में करीब एक सप्ताह लगने की जानकारी दी गई थी। इसी दौरान सुमित का दोस्त कार लेकर अंबिकापुर आ रहा था। रास्ते में पुलिस ने कार को अपराध की जांच के सिलसिले में जब्त कर लिया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 351(3), 115(2), 191(3), 111(2)(बी), 324(4) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत अपराध दर्ज है।

यह भी पढ़ें- बिलासपुर में नींद की गोलियां खाकर स्कूल पहुंची बारहवीं की छात्रा, अचानक आया चक्कर, पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

ट्रायल कोर्ट में अलग नंबर देखकर अटका मामला

कार जब्त होने के बाद सुमित कुमार ने ट्रायल कोर्ट में सुपुर्दनामा पर वाहन वापस देने का आवेदन पेश किया। उन्होंने वाहन का स्थायी पंजीयन प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया। हालांकि 15 अप्रैल 2026 को सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर ने आवेदन खारिज कर दिया। इसका प्रमुख आधार वाहन पर दर्ज अस्थायी नंबर और स्थायी पंजीयन प्रमाणपत्र में दर्ज नंबर का अलग होना था।

इसके बाद सुमित कुमार ने हाई कोर्ट में आपराधिक विविध याचिका दायर की। उनके अधिवक्ता अभिनव दुबे ने पक्ष रखते हुए कहा कि वाहन की खरीद, अस्थायी पंजीयन और बाद के स्थायी पंजीयन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसलिए दोनों नंबरों के अलग होने को वाहन की सुपुर्दगी रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

थाने में पड़े वाहन के खराब होने का भी दिया हवाला

हाई कोर्ट ने जब्त वाहनों को लंबे समय तक थाने में रखने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम गुजरात राज्य तथा मुल्तानी हनीफभाई कालूभाई बनाम गुजरात राज्य के फैसलों का उल्लेख किया। कोर्ट ने माना कि जब्त वाहन लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से खराब होते हैं और पुलिस अभिरक्षा में वर्षों तक वाहन खड़े रहने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। इसलिए उचित शर्तों और सुरक्षा के साथ वाहन उसके स्वामी को सौंपना उचित है।

छह लाख के बांड पर मिलेगी बलेनो

हाई कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए बलेनो कार सुमित कुमार को सुपुर्द करने का निर्देश दिया। वाहन छोड़ने से पहले स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन और पंचनामा तैयार किया जाएगा तथा वाहन की तस्वीरें रिकॉर्ड पर रखी जाएंगी।

सुमित कुमार को अदालत के बुलाने पर वाहन पेश करने, उसे अच्छी स्थिति में रखने और किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं करने की शर्त का पालन करना होगा। इसके लिए उन्हें छह लाख रुपये का निजी बांड और इतनी ही राशि की सक्षम जमानत प्रस्तुत करनी होगी।