
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर, जिला सरगुजा में अधिष्ठाता (डीन) के पद पर पदस्थ डा. अविनाश मेश्राम को राहत देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उनके स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है। राज्य शासन ने 3 सितंबर 2026 को डा. मेश्राम का अंबिकापुर से शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दुर्ग में प्राध्यापक-सह-संचालक के पद पर स्थानांतरण किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई तक स्थानांतरण आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने 10 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलीलों पर विचार किया। कोर्ट ने विशेष रूप से इस तथ्य को ध्यान में रखा कि डॉ. मेश्राम को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता पद से हटाकर दुर्ग मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर-सह-डायरेक्टर के पद पर भेजा गया है, जिसे याचिकाकर्ता की ओर से डीन पद से निचला पद बताया गया।
हाई कोर्ट ने इसे अंतरिम राहत देने के लिए प्रासंगिक मानते हुए 3 सितंबर 2026 के स्थानांतरण आदेश के उस हिस्से के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी, जो डा. मेश्राम की पदस्थापना से संबंधित है। कोर्ट ने राज्य के संबंधित अधिकारियों और प्रतिवादी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका के अनुसार डा. अविनाश मेश्राम पूर्व में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय कोरबा में संचालक-सह-प्राध्यापक के पद पर पदस्थ थे।
छत्तीसगढ़ शासन के 2 नवंबर 2022 के आदेश से उन्हें संचालक-सह-प्राध्यापक से अधिष्ठाता के पद पर पदोन्नत किया गया था। इसके बाद 17 अक्टूबर 2024 को उनकी पदस्थापना शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर में अधिष्ठाता/डीन के पद पर की गई। करीब दो वर्ष बाद 3 सितंबर 2026 को शासन ने उनका स्थानांतरण अंबिकापुर से शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दुर्ग में प्राध्यापक-सह-संचालक के पद पर कर दिया। इसी आदेश को डॉ. मेश्राम ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
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दो साल पूरे नहीं हुए, स्थानांतरण नीति का दिया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने कोर्ट में दलील दी कि डा. मेश्राम की अंबिकापुर में पदस्थापना अक्टूबर 2024 में हुई थी और स्थानांतरण आदेश जारी होने के समय दो वर्ष की अवधि भी पूरी नहीं हुई थी। इसलिए स्थानांतरण को लागू स्थानांतरण नीति के विपरीत बताया गया।
याचिका में यह भी कहा गया कि अंबिकापुर में डॉ. मेश्राम के स्थान पर डॉ. आर.सी. आर्या को पदस्थ किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से आर्या को डॉ. मेश्राम से जूनियर बताते हुए यह तर्क रखा गया कि वे संबंधित कैडर में डीन पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें डीन का प्रभार दिया गया है।
राज्य सहित संबंधित पक्षों को नोटिस
हाई कोर्ट ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। राज्य की ओर से पैनल लॉयर आदित्य तिवारी ने प्रतिवादी क्रमांक एक से तीन की ओर से नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। प्रतिवादी क्रमांक चार को प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी किया गया।
अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर भी नोटिस जारी किया गया है। डा. मेश्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के साथ अधिवक्ता अपूर्वा पांडेय ने पक्ष रखा। याचिका की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।