एट्रोसिटी एक्ट और यूजीसी नियमों की समीक्षा पर अड़ा सवर्ण समाज! बिलासपुर में उठी नीतिगत सुधार की मांग
बिलासपुर में समग्र सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर आरक्षण नीति, एट्रोसिटी एक्ट और यूजीसी नियमों में सुधार की मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर जाति के स्थान पर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने और निर्दोषों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनों की समीक्षा करने का आग्रह किया है।
Publish Date: Thu, 27 Aug 2026 11:04:05 PM (IST)Updated Date: Thu, 27 Aug 2026 11:04:05 PM (IST)
आरक्षण नीति व यूजीसी नियमों में सुधार की मांग, सवर्ण समाज पहुंचा कलेक्ट्रोरेटHighLights
- आरक्षण नीति व यूजीसी नियमों में सुधार की मांग, सवर्ण समाज पहुंचा कलेक्टोरेट
- जाति नहीं, आर्थिक आधार पर मिले आरक्षण! सवर्ण समाज ने कलेक्टोरेट में किया प्रदर्शन
- निष्पक्षता और समानता के लिए केंद्र सरकार से की विशेषज्ञ समिति की मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः समग्र सवर्ण समाज ने आरक्षण नीति, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से संबंधित प्रविधानों को हटाने की मांग लेकर पहुंचे। विभिन्न संगठनों का कहना था कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित विभिन्न कानूनों में सुधार की आवश्यकता है। शासन को सभी पर पुनर्विचार करना चाहिए, विभिन्न समाज के संगठन पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
प्रतिनिधियों ने मांग की कि आरक्षण व्यवस्था की वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए इसका आधार जाति के स्थान पर आर्थिक एवं सामाजिक आवश्यकता को बनाया जाए। स्वतंत्रता के समय की परिस्थितियों और आज के परिवेश में काफी बदलाव आ चुका है, इसलिए व्यापक सामाजिक संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए।
इसके साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में यूजीसी के दिशा-निर्देशों के तहत सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी वर्ग विशेष के अधिकारों को छीनने की नहीं, बल्कि समानता, निष्पक्षता और आर्थिक रूप से कमजोर प्रत्येक नागरिक को संबल देने की है। केंद्र सरकार से विशेषज्ञ समिति गठित कर सभी सामाजिक वर्गों से संवाद के आधार पर आवश्यक विधायी सुधार करने का आग्रह किया गया।
एट्रोसिटी एक्ट व वेमुला कानून की समीक्षा पर जोर
एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के संभावित दुरुपयोग को रोकने और निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए पारदर्शी जांच प्रक्रिया तय करने की मांग की गई। इसके अलावा कर्नाटक में लागू रोहित वेमुला एक्ट के व्यावहारिक प्रभावों और संस्थागत निष्पक्षता के संतुलन पर विचार करने तथा यूजीसी के दिशा-निर्देशों में सभी वर्गों के छात्रों के हितों की रक्षा का आग्रह किया गया।
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विभिन्न समाजों के प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज से अरविंद दीक्षित, राजेश शुक्ला, मनोज तिवारी, मनीष अग्रवाल, डा. प्रदीप शुक्ला, जगदीश त्रिवेदी, सिंधी सेंट्रल पंचायत से विनोद मेघानी, राजपूत क्षत्रिय समाज से अजय सिंह परिहार, खंडेलवाल समाज से आशीष खंडेलवाल, गुजराती समाज से केतन सुतारिया, पंजाबी समाज से परमजीत सिंह सलूजा, विंध्य व मारवाड़ी ब्राह्मण समाज सहित विभिन्न संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भारतीय संविधान का मूल उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अवसर और न्याय प्रदान करना है। आरक्षण का आधार जातिगत न होकर आर्थिक व सामाजिक आवश्यकता के अनुसार तय होना चाहिए। इसके साथ ही यूजीसी नियमों और अन्य कानूनों के दुरुपयोग को रोककर निर्दोषों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को नीतिगत सुधार करने चाहिए। अरविन्द दीक्षित, अध्यक्ष कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज बिलासपुर