• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

उसलापुर के 548 मीटर लंबे प्लेटफार्म पर शौचालय नहीं, कुर्सियां कम होने से फर्श पर बैठे यात्री

बिलासपुर के उसलापुर रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 9 हजार यात्रियों की आवाजाही के बावजूद प्लेटफार्म 2 पर कुर्सियां कम पड़ने से यात्री बैग और फर्श पर बैठने को मजबूर हैं।

By Shiv SoniEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 10:21:52 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 10:21:52 PM (IST)
उसलापुर के 548 मीटर लंबे प्लेटफार्म पर शौचालय नहीं, कुर्सियां कम होने से फर्श पर बैठे यात्री
Demo pic ai

HighLights

  1. उसलापुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 2 पर बैठने की भारी किल्लत।
  2. 548 मीटर लंबे प्लेटफार्म पर शौचालय न होने से यात्री परेशान।
  3. सीनियर डीसीएम ने दूसरे फेज में शेड व चेयर लगाने का दिया भरोसा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: उसलापुर रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्री ट्रेन पकड़ने से पहले बैठने का इंतजाम भी कर लें। यहां प्लेटफार्म दो पर ट्रेन का इंतजार करने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं हैं। ऐसे में खाली कुर्सी नहीं मिलने पर यात्रियों को अपने बैग को ही आसन बनाना पड़ रहा है। कई यात्रियों को मजबूरी में फर्श पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ रहा है। परिवार के साथ सफर करने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानी और बढ़ जाती है। शहर के दूसरे प्रमुख रेलवे स्टेशन की यह तस्वीर रेलवे की यात्री सुविधाओं के दावों पर सवाल खड़े करती है।

उसलापुर रेलवे स्टेशन शहर का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन है। इसकी उपयोगिता बढ़ाने रेल प्रशासन ने रायपुर व दुर्ग से आने वाली ट्रेनों का ठहराव बिलासपुर में बंद कर, उसलापुर में शुरू कर दिया है। इसी वजह से यात्रियों की संख्या भी पहले की तुलना में दोगुना हो गई है।


यात्रियों की संख्या के अनुरूप इस स्टेशन में सुविधाओं की कमी अब यात्रियों को परेशान कर रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। यहां अप और डाउन दिशा मिलाकर प्रतिदिन 24 ट्रेनों का ठहराव है। इन ट्रेनों से यात्रा करने के लिए अलग-अलग समय पर यात्रियों की भीड़ प्लेटफार्म पर पहुंचती है।

ज्यादतर ट्रेनें प्लेटफार्म दो पर ही ठहरती है। किसी को गंतव्य तक जाने वाली ट्रेन का इंतजार रहता है तो कोई रायपुर की ओर से आने वाले स्वजन को लेने पहुंचता है। लेकिन स्टेशन पर पहुंचने के बाद इस प्लेटफार्म पर सबसे पहली समस्या बैठने के लिए जगह तलाशने की होती है। प्लेटफार्म पर उपलब्ध कुर्सियां यात्रियों की संख्या के लिहाज से कम पड़ रही हैं। नतीजतन खाली जगह तलाशते यात्री इधर-उधर भटकते नजर आते हैं।

मंगलवार को भी इसी तरह का नजारा देखने को मिला। प्लेटफार्म दो पर दुर्ग- उधमपुर एक्सप्रेस पहुंचने वाली थी। इस ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों से प्लेटफार्म खचाखच था। स्थिति यह रही कि जिन यात्रियों को कुर्सी मिल गई, वे राहत महसूस करते रहे, जबकि आधे यात्रियों को खड़े रहकर या फर्श पर बैठकर समय बिताना पड़ता है।

यह भी पढ़ें- TET परीक्षा में अंकों को राउंड ऑफ करने से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का इनकार, विशेषज्ञों की उत्तर कुंजी सही

ज्यादातर यात्री अपने साथ रखे बैग को ही बैठने के लिए इस्तेमाल करते दिखे। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह परेशानी और भी असहज करने वाली है। ट्रेन निर्धारित समय से विलंब थी, इसलिए प्लेटफार्म पर अधिक समय तक बैठना पड़ा।

सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार यात्रियों को होती है। उनके लिए लंबे समय तक खड़े रहना आसान नहीं होता। परिवार के साथ सफर करने वाले यात्रियों को बच्चों को संभालने के साथ बैठने की जगह भी तलाशनी पड़ी। सामान अधिक होने पर परेशानी दोगुनी हो जाती है। कई बार एक यात्री को बैठाने के लिए दूसरे सदस्य को खड़े रहना पड़ता है। रेल प्रशासन यात्रियों की इस समस्या से वाकिफ है। बावजूद इसके लिए उन्होंने इसे दूर करने का प्रयास नहीं किया।

300 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था, इतने की और आवश्यकता

उसलापुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर 12 व चार सीटर कुर्सियों को मिलाकर 300 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि इतने ही यात्रियों के बैठने के लिए कुर्सियों की आवश्यकता है। स्टेशन प्रबंधन की ओर से कई बार इस कमी को दूर करने का प्रस्ताव भेजा गया। पर अब तक व्यवस्था नहीं हुई।

12 से अधिक ट्रेनों का ठहराव

उसलापुर स्टेशन का यह प्लेटफार्म लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। बिलासपुर, रायपुर व दुर्ग से प्रतिदिन छूटने वाली 12 ट्रेनों का ठहराव यहां रहता है। साप्ताहिक ट्रेनों को शामिल करेंगे तो संख्या 15 से अधिक है। जिनमें बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस, बिलासपुर- भाेपाल एक्सप्रेस, बिलासपुर- चिरमिरी एक्सप्रेस, दुर्ग- छपरा सारनाथ एक्सप्रेस, दुर्ग- नवनतवा एक्सप्रेस, दुर्ग-अंबिकापुर एक्सप्रेस, गोंदिया- बरौनी एक्सप्रेस, बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, दुर्ग- उधमपुर एक्सप्रेस, दुर्ग- निजामुद्दीन संपर्कक्रांति एक्सप्रेस, रायपुर- लखनऊ गरीब रथ एक्सप्रेस, दुर्ग- निजामुद्दीन हम सफर एक्सप्रेस शामिल है।

महत्वपूर्ण प्लेटफार्म पर शौचालय नहीं

उसलापुर के इस प्लेटफार्म की एक समस्या तो हैरान करनी वाली है। इसके कटनी छोर पर शौचालय की व्यवस्था ही नहीं है। यह समस्या तब से हैं, जब से स्टेशन अस्तित्व में आया है। 548 मीटर लंबे इस प्लेटफार्म पर यदि कोई यात्री खड़ा है तो शौचालय का उपयोग करना है तो उसे एक से दूसरे छोर पर जाना पड़ता है। अमृत भारत स्टेशन योजना के पहले फेज का काम हो चुका है। लेकिन, एक शौचालय निर्माण को योजना में शामिल ही नहीं किया गया।

क्या कहते हैं यात्री

फर्श पर बैठने के लिए यात्री विवश - नवीन कश्यप

यात्री नवीन कश्यप का कहना है कि उसलापुर रेलवे स्टेशन पर बुजुर्गों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। ट्रेन आने में कभी-कभी दो से तीन घंटे तक लग जाते हैं। ऐसे में इतनी देर खड़े रहना काफी मुश्किल होता है। उसलापुर स्टेशन के प्लेटफार्म दो पर कुर्सियां कम होने के कारण खाली जगह तलाशनी पड़ती है। कई बार मजबूरी में फर्श पर बैठना पड़ता है। रेलवे को यात्रियों की संख्या के हिसाब से बैठने की व्यवस्था बढ़ानी चाहिए। खासकर बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग से पर्याप्त कुर्सियां होनी चाहिए, ताकि उन्हें ट्रेन के इंतजार में परेशानी न उठानी पड़े।

बुनियादी सुविधा का अभाव समझ से परे- दीपक

दीपक कौशिक का कहना है कि परिवार और बच्चों के साथ यात्रा करने पर स्टेशन की अव्यवस्था ज्यादा परेशान करती है। ट्रेन का इंतजार करते समय बच्चों को संभालना और सामान की देखरेख करना आसान नहीं होता। अगर बैठने के लिए कुर्सी ही न मिले तो परेशानी और बढ़ जाती है। इसीलिए बैग पर या फर्श पर बैठकर समय बिताना पड़ता है। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए सबसे पहले पर्याप्त बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए। उसलापुर जैसे प्रमुख स्टेशन पर ऐसी बुनियादी सुविधा का अभाव समझ से परे है।

जरूरी सुविधाएं देना भी रेलवे की जिम्मेदारी- रामस्नेही

रामस्नेही पटेल का कहना है कि उसलापुर स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव लगातार है और यात्रियों की आवाजाही भी कम नहीं है। इसके बावजूद बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां नहीं होना रेलवे की तैयारी पर सवाल खड़ा करता है। रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। ट्रेन लेट होने पर स्थिति और खराब हो जाती है। यात्री प्लेटफार्म पर पहुंचकर पहले बैठने की जगह तलाशते हैं। रेलवे को चाहिए कि प्लेटफार्म पर खाली स्थानों का उपयोग कर अतिरिक्त कुर्सियां लगाई जाएं। यात्रियों से किराया लेने के साथ उन्हें जरूरी सुविधाएं देना भी रेलवे की जिम्मेदारी है।

नंबर गेम-

  • 12 ट्रेनों का प्रतिदिन ठहराव।
  • 300 और यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की आवश्यकता।
  • 09 हजार यात्री प्रतिदिन करते हैं यात्रा

    उसलापुर स्टेशन में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत काम चल रहा है। पहले फेज का काम हो गया है। दूसरे फेज में शेड व चेयर की व्यवस्था करने को शामिल रखा गया है। आने वाले दिनों में यात्रियों को बैठने की समस्या नहीं होगी। अनुराग कुमार सिंह सीनियर डीसीएम, बिलासपुर रेल मंडल

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।