पाली विकासखंड के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में चंगाई सभाओं को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
पाली विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में आयोजित चंगाई सभाओं को लेकर धर्मांतरण की आशंका जताते हुए ग्रामीणों और बजरंग दल ने आपत्ति दर्ज कराई है। सूचना पर पहुंची डायल 112 की टीम ने पारसपारा निवासी पास्टर समेलाल को थाने लाकर पूछताछ की और पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 04:29:31 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 04:29:31 PM (IST)
स्थल पर लगी लोगों की भीड, नईदुनियाHighLights
- पाली के वनांचल में चंगाई सभा की आड़ में धर्मांतरण की आशंका पर पास्टर को नोटिस जारी।
- बजरंग दल की शिकायत के बाद पुलिस ने पास्टर समेलाल से पूछताछ कर स्पष्टीकरण मांगा।
- ग्रामीणों ने कथित चर्चनुमा भवनों के निर्माण और भूमि उपयोग की जांच की मांग की।
नईदुनिया प्रतिनिधि, पाली : पाली विकासखंड के सुदूर वनांचल एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में आयोजित हो रही चंगाई सभाओं और धार्मिक गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ स्थानीय लोगों ने इन आयोजनों के माध्यम से मतांतरण की आशंका जताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कथित चर्चनुमा भवनों के निर्माण और उनके उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच पाली क्षेत्र के पारसपारा निवासी पास्टर समेलाल को पुलिस द्वारा नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बजरंग दल के कान्हा पटेल ने पाली क्षेत्र के पहाड़चमड़ी में पास्टर द्वारा चंगाई सभाओं का आयोजन करने की सूचना दी। उन्होंने बताया कि इन सभाओं में होने वाली गतिविधियों को लेकर कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। कुछ स्थानों पर कथित रूप से चर्चनुमा भवन बनाए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे भवनों के निर्माण में भूमि उपयोग, राजस्व अभिलेख और निर्माण संबंधी अनुमति सहित आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है या नहीं, यह जांच का विषय है।
उन्होंने मांग है कि प्रशासन संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच करे और वस्तुस्थिति स्पष्ट करे। उनकी सूचना पर डायल 112 की टीम स्थल पर पहुंची और पास्टर को लेकर थाना आ गई। जहां पूछताछ के बाद पास्टर समेलाल को पुलिस ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। संबंधित पक्ष का जवाब और पुलिस की जांच के बाद ही इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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मामले को लेकर प्रशासन से धार्मिक आयोजन, भूमि उपयोग और भवन निर्माण से संबंधित नियमों की निष्पक्ष जांच की अपेक्षा की जा रही है। धार्मिक स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, वहीं किसी भी गतिविधि में कानून और प्रशासनिक नियमों का पालन भी अनिवार्य है। ऐसे में मतांतरण संबंधी आशंकाओं और अन्य आरोपों की जांच पूर्वाग्रह से मुक्त होकर तथ्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर किया जाना जरूरी है।