• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Virginity Test: ‘पति चाहे तो अपनी नपुंसकता की जांच करवा ले, लेकिन पत्नी के वर्जिनिटी टेस्ट की अनुमति नहीं देंगे’... बिलासपुर हाई कोर्ट का फैसला

मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ का है। अप्रैल 2023 में दोनों की शादी हुई थी। कुछ दिनों के बाद ही विवाद शुरू हो गए। पति ने पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाया ...और पढ़ें

By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Thu, 27 Mar 2025 09:02:21 AM (IST)Updated Date: Thu, 27 Mar 2025 09:08:00 AM (IST)
Virginity Test: ‘पति चाहे तो अपनी नपुंसकता की जांच करवा ले, लेकिन पत्नी के वर्जिनिटी टेस्ट की अनुमति नहीं देंगे’... बिलासपुर हाई कोर्ट का फैसला
फैमिली कोर्ट ने भी पति की मांग खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. बिलासपुर हाई कोर्ट ने पति की याचिका खारिज की
  2. कहा- यह मांग संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ
  3. महिलाओं की गरिमा के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में पति द्वारा पत्नी के कौमार्य परीक्षण (वर्जिटिनी टेस्ट) की मांग को असंवैधानिक ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की मांग न केवल महिलाओं की गरिमा के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के भी विपरीत है।

रायगढ़ के पारिवारिक न्यायालय में जुलाई 2024 को दर्ज मामले में पत्नी ने ₹20,000 प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी। दोनों की शादी 30 अप्रैल 2023 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी, लेकिन जल्द ही संबंधों में दरार आ गई।


naidunia_image

पत्नी ने पति को बताया नपुंसक

  • पत्नी ने अपने पति पर नपुंसकता का आरोप लगाया, जबकि पति ने प्रत्यारोपण करते हुए पत्नी के अपने बहनोई से अवैध संबंध होने की बात कही और उसके कौमार्य परीक्षण की मांग की।
  • पति की इस याचिका को पारिवारिक न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में अपील दायर की। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने क्रिमिनल रिवीजन की सुनवाई के दौरान इस पर गंभीर टिप्पणी की।
  • कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कौमार्य परीक्षण असंवैधानिक है और महिला की गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।
  • कोर्ट ने आगे कहा- अगर पति खुद पर लगे आरोपों को गलत साबित करना चाहता है, तो वह खुद का मेडिकल परीक्षण करा सकता है, लेकिन पत्नी पर ऐसा आरोप थोपना अवैध है।

naidunia_image

यहां भी क्लिक करें -तुम जैसा रखोगे वैसे रहूंगी, बस घर आ जाओ... नाराज पति को मनाने के लिए पत्नी ने बनाया इमोशनल वीडियो

निचली अदालत काे माना सही

हाई कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि पत्नी के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना सर्वोपरि है। कोर्ट ने दोहराया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार हैं, जिन्हें छीना नहीं जा सकता।

दो फैसलों का दिया हवाला

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के दो फैसलों का हवाला दिया। जिसमें राज्य बनाम शैलेन्द्र कुमार राय (2022) 14 एससीसी 299 शामिल था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने टू फिंगर टेस्ट को अवैध और पीड़िता के अधिकारों के खिलाफ बताया था।

वहीं, सीबीआई बनाम सिस्टर सेफी (दिल्ली हाई कोर्ट, 2023) मामले का हवाला दिया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला आरोपी का कौमार्य परीक्षण असंवैधानिक करार दिया है।

यहां भी क्लिक करें - CG हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारियों की निलंबन अवधि को माना जाएगा ड्यूटी का हिस्सा

यहां भी क्लिक करें - हाई कोर्ट का फैसला जो रेलवे अफसरों के लिए बनेगा नजीर