
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मूसलधार वर्षा ने जब बिलासपुर की रफ्तार थाम दी, हजारों परिवार जलभराव, बिजली संकट और भोजन की समस्या से जूझने लगे। ऐसे कठिन समय में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) के स्वयंसेवक राहत की सबसे भरोसेमंद कड़ी बनकर उभरे। स्वयंसेवकों ने अलग-अलग जगहों में जाकर दो हजार भोजन पैकेट वितरित किए। ग्रामीण अंचलों तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं भी सुनीं और हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिलाया।
न्यायधानी में लगातार हुई वर्षा से शहर के कई मोहल्लों में घरों के भीतर तक पानी भर गया। सड़कें जलमग्न होने से आवागमन बाधित रहा और अनेक परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बन गई। ऐसे हालात में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना ने सेवा को अपना सबसे बड़ा दायित्व मानते हुए राहत अभियान शुरू किया। कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल के मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से कार्यक्रम समन्वयक डा.रमेश कुमार गोहे के नेतृत्व में जीजीवी परिसर, कोनी तथा आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में लगभग दो हजार भोजन पैकेट वितरित किए गए। पैकेट में सब्जी और पुड़ी शामिल थी।
अभियान के दौरान डा. विनोद कुमार विश्वकर्मा, सहायक आचार्य, वाणिज्य विभाग भी लगातार मौजूद रहे। स्वयंसेवकों में मनीष कुमार, अर्जुन मुखी, आकांक्षा वर्मा, सूरज कुमार तथा अन्य सदस्यों ने जलभराव वाले इलाकों और ग्रामीण अंचलों तक पहुंचकर राहत सामग्री पहुंचाई। उन्होंने केवल भोजन ही नहीं बांटा, प्रभावित परिवारों की परेशानियां सुनीं, जरूरतों का आकलन किया और उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया। शहर में विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों के साथ समन्वय बनाकर किए गए इस सेवा कार्य ने यह साबित किया कि आपदा के समय संवेदनशील युवा समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
यह भी पढ़ें- बिलासपुर में अभी नहीं थमेगी आफत की बारिश; 23 जुलाई तक भारी वर्षा और गरज-चमक का अलर्ट
सेवा का पाठ किताबों से आगे
राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों के लिए यह केवल राहत अभियान नहीं था, सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का अवसर भी था। वर्षा के बीच लगातार दो दिनों तक टीम अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंची, हालात का जायजा लिया और लोगों से संवाद किया। कई परिवारों ने स्वयंसेवकों को अपनी समस्याएं बताईं, जिन्हें संबंधित स्तर तक पहुंचाने का भी प्रयास किया गया। बता दें कि इसके पहले भी यहां के स्वंयसेवक बुजुर्गों की लाठी बनकर आवश्यक दवाईं पहुंचाने का काम कोविड-19 के समय किए थे। मास्क, सैनिटाइजर से लेकर फल, राशन एवं दवाईयां तक पहुंचाया।
कुलपति ने बढ़ाया सेवा का उत्साह
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल लगातार राहत गतिविधियों की जानकारी लेते रहे और स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते रहे। उन्होंने सेवा कार्य को विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए जरूरतमंदों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने पर जोर दिया। उनके मार्गदर्शन से स्वयंसेवकों का मनोबल लगातार ऊंचा बना रहा।
गांवों तक पहुंची राहत की पहल
राहत अभियान केवल शहर तक सीमित नहीं रहा। स्वयंसेवकों ने कोनी और आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी पहुंचकर हालात का जायजा लिया। कई स्थानों पर लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनकी आवश्यकताओं की जानकारी जुटाई गई। प्राकृतिक आपदा के बीच युवाओं की यह सक्रिय मौजूदगी प्रभावित परिवारों के लिए भरोसे और आत्मविश्वास का बड़ा सहारा बनी।