नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पत्नी की ओर से अपमानित करने, मारपीट करने, चरित्र पर संदेह जताने और बुजुर्ग मां से अलग रहने का दबाव बनाने के आरोपों को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक जीवन में मानसिक क्रूरता के समग्र प्रभाव के रूप में स्वीकार किया।
परिवार न्यायालय ने तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी
बस्तर जिले के जगदलपुर निवासी मित्तेश ने पत्नी वेदवती उर्फ ममता के खिलाफ मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था। दोनों का विवाह आठ जून 2017 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था और उनकी कोई संतान नहीं है। परिवार न्यायालय ने पति के आरोपों को प्रमाणित नहीं मानते हुए तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ पति ने हाई कोर्ट में अपील की।
भिखारी व हैसियतहीन कहकर अपमानित करती थी
पति के अनुसार, वह किराये की छोटी इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान चलाता था और उसकी सीमित आय की जानकारी पत्नी के परिवार को विवाह से पहले थी। इसके बावजूद पत्नी कम कमाई को लेकर ताने देती और उसे भिखारी व हैसियतहीन कहकर अपमानित करती थी।
मायके जाने की जिद करती, बिना सहमति घर छोड़कर चली जाती थी
उसने पत्नी पर चरित्रहीन होने का संदेह करने, गाली-गलौज और मारपीट करने तथा बुजुर्ग मां से अलग रहने का दबाव बनाने का आरोप लगाया। पति ने यह भी कहा कि पत्नी आत्महत्या की धमकी देती, रात में मायके जाने की जिद करती और बिना सहमति घर छोड़कर चली जाती थी। उसके मुताबिक, लगातार तनाव और विवाद से व्यवसाय प्रभावित हुआ और दुकान बंद करनी पड़ी।
पत्नी ने यह आरोप लगाए
पत्नी ने आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि ससुराल में उसे पहली मंजिल के एक कमरे तक सीमित रखा गया, दूसरे कमरों में जाने नहीं दिया गया और मायके से मिले सामान को ताले में बंद कर दिया गया। उसने ठीक से भोजन नहीं देने और दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
उसके अनुसार, भ्रूण में असामान्यता के कारण चिकित्सकीय सलाह पर गर्भपात कराया गया था। उसने पति की आय अधिक बताते हुए भरण-पोषण मांगा और वैवाहिक जीवन फिर शुरू करने की इच्छा जताई।
गवाही को मां के बयान से मिला समर्थन
पीठ ने कहा कि गर्भपात, आत्महत्या की धमकी और वैवाहिक संबंधों से जुड़े कुछ व्यक्तिगत आरोपों के समर्थन में पर्याप्त विश्वसनीय प्रमाण नहीं थे। इसलिए तलाक का आधार कोई एक आरोप नहीं हो सकता। हालांकि, पति की गवाही को उसकी मां के बयान से समर्थन मिला, जबकि पत्नी के कुछ गवाहों ने माना कि उन्होंने विवाद स्वयं नहीं देखा था।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना आधार
समर घोष बनाम जया घोष सहित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि सामान्य वैवाहिक झगड़े अपने आप में मानसिक क्रूरता नहीं हैं। लेकिन लगातार विवाद, गंभीर अविश्वास, अपमानजनक व्यवहार और परिवार के साथ रहने को लेकर लंबे तनाव का संयुक्त प्रभाव साथ रहना कठिन बना सकता है।