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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 26, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पिता ने तीन बच्चों को अपने घर में ही ढाई महीने से कर रखा था कैद

सेना से सेवानिवृत और वर्तमान में सेक्टर-9 अस्पताल में प्राइवेट गार्ड का काम करने वाले पिता ने अपने ही तीन मासूम बच्चों को घर के भीतर कैद कर रखा था।

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Tue, 26 Apr 2022 12:51:08 AM (IST)Updated Date: Tue, 26 Apr 2022 12:51:08 AM (IST)
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पिता ने तीन बच्चों को अपने घर में ही ढाई महीने से कर रखा था कैद

दुर्ग। सेना से सेवानिवृत और वर्तमान में सेक्टर-9 अस्पताल में प्राइवेट गार्ड का काम करने वाले पिता ने अपने ही तीन मासूम बच्चों को घर के भीतर कैद कर रखा था। बच्चों के साथ मारपीट करता था और उन्हें भोजन पानी भी नहीं देता था। पड़ोसियों की शिकायत पर चाइल्ड लाइन को इस मामले की जानकारी मिली।

मौके पर पहुंची चाइल्ड लाइन की टीम ने तीनों बच्चों को रेस्क्यू किया। बच्चों को फिलहाल मातृ छाया में रखा गया है। चाइल्ड लाइन की टीम ने बच्चों के नाना-नानी को इसकी जानकारी दे दी है। नाना-नानी रतलाम में रहते हैं।उन्हें सूचना दे दी गई है।


घटना भिलाई के वैशाली नगर गोल मार्केट स्थित ईडब्ल्यूएस कॉलोनी की है। चाइल्ड लाइन की टीम को सोमवार सुबह 11 बजे 1098 पर सूचना मिली कि यहां तीन बच्चों को उसके पिता ने अपने घर में ही कैद कर रखा है। सूचना मिलते ही टीम लीडर भारती चौबे के नेतृत्व में चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने ईडब्ल्यूएस कॉलोनी पहुंचकर घर का दरवाजा खटखटाया लेकिन पिता दरवाजा खोलने को तैयार नहीं था।

इस पर पुलिस बुलाने की बात कही गई। पुलिस का नाम सुनते ही पिता ने दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही घर के भीतर से दुर्गंध आने लगी। चाइल्ड लाइन के मुताबिक बच्चे घर के भीतर ही मल मूत्र किए हुए थे। बच्चों के पिता का नाम एम. वेंकट राव है और उसकी उम्र करीब 58 साल बताई गई है। वह पहले सेना में जवान था।

एम .वेंकट राव की पत्नी का निधन सालभर पहले टीबी की बीमारी से हो गया। चाइल्ड लाइन के मुताबिक एम .वेंकट राव के तीन बच्चे हैं। जिसमें एक लड़का छह साल का है और दो लड़कियों की उम्र क्रमशः साढ़े चार साल और तीन साल बताई गई है।

रेस्क्यू करने गई टीम के सदस्यों के साथ एम. वेंकट राव ने दुर्व्यवहार भी किया। टीम के सदस्य सुबह 11 बजे से गए थे और रेस्क्यू कर शाम पांच लौटे। रेसक्यू के बाद तीनों बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। बच्चों को फिलहाल मातृ छाया में रखा गया है। पर्याप्त मात्रा में भोजन पानी नहीं मिलने की वजह से बच्चे कुपोषण का शिकार हो गए हैं।

मोहल्ले वाले देते थे बिस्कुट और पानी

चाइल्ड लाइन के सदस्यों को मोहल्ले वालों ने पूरे घटनाक्रम के संबंध में जानकारी दी। मोहल्ले वासियों के मुताबिक पिता अपने बच्चों को करीब ढाई महीने से घर के भीतर कैद कर रखा हुआ है। उन्हें बाहर निकलने ही नहीं देता था। मोहल्ले वासी बच्चों के लिए बिस्कुट,पानी व अन्य खाद्य सामग्री उनके घर की छत पर फेंककर देते थे। चाइल्ड लाइन के मुताबिक बच्चों का पिता नशे का आदी है।

आज भी टीम पहुंची तो उसने शराब सेवन कर रखा था। मोहल्ले वासियों ने टीम को यह भी बताया कि पिता अपने बच्चों के साथ मारपीट भी करता है। कभी-कभी डंडे से भी मारता है। तीनों बच्चे घर पर ही रहते हैं,इनमें से कोई भी स्कूल नहीं जाता। चाइल्ड लाइन के मुताबिक पिता मानसिक रूप से विक्षिप्त भी है।

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पिता ने तीन बच्चों को अपने ही घर में कैद कर रखा था। शिकायत पर चाइल्ड लाइन की टीम ने बच्चों को रेस्क्यू किया गया। बच्चों को मातृ छाया में रखा गया है।

-भारती चौबे, टीम लीडर चाइल्ड लाइन दुर्ग

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