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छत्तीसगढ़ बनने के बाद 23 साल में 364 आधिकारिक मतांतरण, चर्च की संख्या पहुंची डेढ़ हजार के पार

छत्तीसगढ़ गठन के बाद 23 साल में बस्तर जिले में सिर्फ 364 लोगों ने मतांतरण की आधिकारिक सूचना दी है।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 23 May 2026 07:50:42 AM (IST)Updated Date: Sat, 23 May 2026 07:58:30 AM (IST)
छत्तीसगढ़ बनने के बाद 23 साल में 364 आधिकारिक मतांतरण, चर्च की संख्या पहुंची डेढ़ हजार के पार
बस्तर में मतांतरितों व आदिवासी समाज के बीच बढ़ रहा तनाव। - प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. मतांतरण की सरकारी प्रक्रिया भी नहीं हुई पूरी
  2. सादे कागज पर दी सूचना रजिस्टर में दर्ज कर छोड़ दिया
  3. सर्व आदिवासी समाज जुटा रहा पंचायतवार डेटा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। नवंबर 2000 में राज्य गठन के बाद से लेकर 2023 तक केवल 364 लोगों ने ही मतांतरण की आधिकारिक सूचना दी, लेकिन इन्हीं वर्षों में बस्तर में चर्च और प्रार्थना केंद्रों की संख्या डेढ़ हजार के पार पहुंच गई। दरअसल, मतांतरण और डी-लिस्टिंग को लेकर बहस के बीच बस्तर में सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) से सामने आए आंकड़ों ने नई चर्चा छेड़ दी है।

सर्व आदिवासी समाज ने जिला प्रशासन से आरटीआई के तहत वर्ष 2025 तक की जानकारी मांगी थी। जिला प्रशासन ने उन्हें नवंबर 2000 से फरवरी 2023 तक बस्तर जिले में केवल 364 लोगों के ही मतांतरण की जानकारी दी। प्रशासन के पास 2023 के बाद की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। जबकि सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि यहां भारी संख्या में मतांतरण कराए गए हैं।


प्रक्रिया पूरी करने की सुध नहीं ली गई

बता दें कि मतांतरण की सरकारी प्रक्रिया होती है, जिसे पूरा करना जरूरी होता है। आरटीआई से मिली जानकारी से पता चलता है कि मतांतरण की सूचना देने वालों में से अधिकांश ने सादे कागज पर, तो कुछ ने शपथ पत्र के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई। प्रशासन द्वारा रजिस्टर में जानकारी दर्ज कर ली गई, लेकिन आगे की प्रक्रिया किसी ने पूरी की या नहीं, इसकी सुध नहीं ली गई।

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मिशनरीज हावी हो रहीं

सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष दशरथ कश्यप ने बताया कि समाज पंचायतवार मतांतरण और चर्च व प्रार्थना घरों की जानकारी जुटा रहा है। वहीं प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व विधायक राजाराम तोड़ेम ने कहा कि मतांतरितों की पूरी जानकारी न होने का नतीजा है कि मिशनरीज हावी हो रही हैं।

आरक्षण खत्म हो तभी रुकेगा

वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत संगठन मंत्री रामनाथ कश्यप का कहना है कि मतांतरण से आदिवासी संस्कृति को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने मतांतरितों को दोहरी सुविधा मिलने को गलत ठहराया।

यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ में मतांतरण का मकड़जाल, प्रदेश में टीटीआई का मिशनरी कमांडर था डेविड चाको