• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • जगदलपुर

मणिपुर में उग्रवादियों की गोलीबारी में छत्तीसगढ़ का बेटा बलिदान, तीन मासूम बेटियों से छिना पिता का साया

भारत पूर्वोत्तरी राज्य मणिपुर में शुक्रवार शाम उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर अचानक से हमला कर दिया। अचानक हुई इस गोलीबारी में सेना के 2 जवान...और पढ़ें

By Animesh PaulEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Sat, 20 Sep 2025 12:48:23 PM (IST)Updated Date: Sat, 20 Sep 2025 12:49:18 PM (IST)
मणिपुर में उग्रवादियों की गोलीबारी में छत्तीसगढ़ का बेटा बलिदान, तीन मासूम बेटियों से छिना पिता का साया
छत्तीसगढ़ का बेटा बलिदान

HighLights

  1. मणिपुर में उग्रवादी हमले में छत्तीसगढ़ का जवान बलिदान
  2. बस्तर के निवासी जवान रंजीत कुमार कश्यप को लगी गोली
  3. मासूम बेटियों के सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर: मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में शुक्रवार शाम उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया। अचानक हुई गोलीबारी में एक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले में असम राइफल्स के एक जूनियर कमीशंड आफिसर (जेसीओ) और छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बालेंगा ग्राम उपयगुड़ापारा निवासी जवान रंजीत कुमार कश्यप बलिदान हो गए, जबकि तीन अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हैं। इनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है।

naidunia_image

बलिदानी रंजीत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बुजुर्ग मां-बाप का सहारा छिन गया और रंजीत की तीन मासूम बेटियों के सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया।


छुट्टी से लौटे पांच दिन भी नहीं बीते

ग्रामीणों ने बताया कि रंजीत पिछले महीने छुट्टी पर घर आया था। करीब एक माह तक उसने परिजनों के साथ समय बिताया और मात्र पांच दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटा था। उसने अपने साथियों से कहा था कि सेवा के तीन साल शेष हैं, जिसके बाद रिटायर होकर गांव लौटेगा और अपने मां-बाप का सहारा बनेगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

यह भी पढ़ें- संघर्ष विराम की घोषणा से माओवादी संगठन में गहराई दरार, शांति वार्ता का प्रस्ताव का विरोध

बचपन से था देशसेवा का सपना

परिजनों ने बताया कि रंजीत शुरू से ही सेना में जाकर देश की रक्षा करना चाहता था। उसी सपने को पूरा करते हुए वह असम राइफल्स में भर्ती हुआ। उसकी तीन बेटियां हैं, जबकि बहन की शादी भी एक बीएसएफ जवान से हुई है।