
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर: कुख्यात माओवादी हिड़मा का साथी बारसे देवा अपने 17 साथियों के साथ शुक्रवार को हैदराबाद में समर्पण कर सकता है। हिड़मा के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद वह हिंसक दल की कमान संभाल रहा है। जानकारी के अनुसार, वह पुलिस के पास पहुंच गया और शुक्रवार को उसके समर्पण की घोषणा होगी।
बता दें कि देश से शीर्ष माओवादी हिंसकों का या तो सफाया हो चुका है या फिर वह सरेंडर कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद सरेंडर करने पहुंचा देवा कई दिनों से मुलगु के जंगलों में अपनी टीम के साथ छिपा हुआ था। हिड़मा के जीवित रहते ही संगठन ने देवा को बटालियन की कमान सौंप दी थी। वह हिड़मा के ही गांव पूवर्ती का रहने वाला है।
गौरतलब है कि, सरकार और सुरक्षा बलों के प्रयास से देश में माओवाद लगभग अपने अंतिम दौर में चल रहा है। सरकार की ओर से देश को 31 मार्च 2026 तक देश को माओवादी आंतक से मुक्त करवाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को इस दिशा में सकरात्मक परिणाम मिलते नजर आ रहे हैं।
साल 2025 माओवादियों के खात्मे के लिए चलाए जा रहे अभियान में अहम रहा। बसव राजू, हिंड़मा, शंकर देवजी जैसे कुख्यात और बड़े माओवादियों को प्रशासन ने ढे़र कर दिया है। इस साल सुरक्षा बल के जवानों ने सैंकड़ों माओवादियों को मार गिराया है। वहीं मौत के डर से और सरकार के पुनर्वास योजनाओं ने प्रभावित होकर 500 के करीब माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है।
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अब देशभर में गिनती के जिले हीं माओवाद से प्रभावित रह गए हैं, वह भी नाम मात्र के लिए। अंतत देश को इस चार दशक पुराने माओवाद के अंधकार से छुटकारा मिलने वाला है।
माओवाद के अंत के साथ ही छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में अब विकास कार्यों से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने लगी है, प्रदेश के बस्तर संभाव में निवेश आ रहा है, साथ ही पर्यटन और अन्य क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।