
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर: महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) विशेष जोनल समिति के सक्रिय सदस्य अनंत उर्फ़ विकास नागपुरे, अनिल और नवजोत नागपुरे ने शुक्रवार को गोंदिया पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है।
पुलिस के अनुसार वे लंबे समय से माओवादी संगठन में शीर्ष स्तर पर सक्रिय थे और कई छद्म नामों जैसे रमेश सैय्याना, भास्कर लिंगव्या और रामास्वामी के ज़रिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते थे। उनके साथ कुल 10 माओवादी कैडरों ने भी पुनर्वास से पुनर्जीवन अपनाया है। यह कदम सुरक्षा एजेंसियों और तीनों राज्यों की संयुक्त अभियान रणनीति के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
माओवादी अपने साथ एके–47, एसएलआर, इंसास रायफलें, मैगज़ीन और भारी मात्रा में गोला-बारूद लेकर आए हैं। ये सभी माओवादी दरेकसा दलम से जुड़े बताए गए हैं, जो एमएमसी क्षेत्र के गोंदिया–राजनांदगांव–बालाघाट के जंगलों में वर्षों से सक्रिय रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुनर्वासित माओवादियों पर संयुक्त रूप से लगभग 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
कुछ दिन पहले अनंत ने भेजा था शांति प्रस्ताव
महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आत्मसमर्पण से कुछ दिन पहले ही अनंत ने स्वयं को एमएमसी क्षेत्र का प्रवक्ता बताते हुए तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक शांति प्रस्ताव भेजा था। इस पत्र में उन्होंने घोषणा की थी कि संगठन 1 जनवरी 2026 को सामूहिक रूप से हथियार छोड़ने के लिए तैयार है, बशर्ते सुरक्षा बल अपनी कार्रवाई अस्थायी रूप से रोकें। संपर्क में रहने के लिए उन्होंने एक खुली वायरलेस तरंग (आवृत्ति 435.715 मेगाहर्ट्ज) भी सार्वजनिक की थी। वर्तमान आत्मसमर्पण को उसी प्रस्ताव का पहला बड़ा संकेत माना जा रहा है।
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पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह घटना माओवादी संगठन में गहरी निराशा, अंदरूनी टूट और संसाधनों की कमी को दर्शाती है। वर्ष 2025 में लगातार हुई कार्रवाइयों, वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने और पुनर्वास योजनाओं की प्रभावशीलता ने संगठन को भीतर तक कमजोर किया है। पुनर्वासित माओवादियों को सरकारी योजना के अनुसार सुरक्षा, उपचार और पुनर्वास प्रदान किया जा रहा है।