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हिड़मा की मौत के बाद बस्तर में ‘आत्मसमर्पण की सुनामी’, 10 दिनो में मुख्यधारा में लौटें 161 माओवादी

हिड़मा की मौत के बाद बस्तर में माओवादियों के समर्पण में तेजी आई है। पिछले 10 दिनों में क्षेत्र में 161 माओवादी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें हैं। ...और पढ़ें

By Animesh PaulEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Sat, 29 Nov 2025 09:17:20 AM (IST)Updated Date: Sat, 29 Nov 2025 09:20:04 AM (IST)
हिड़मा की मौत के बाद बस्तर में ‘आत्मसमर्पण की सुनामी’, 10 दिनो में मुख्यधारा में लौटें 161 माओवादी
चैतु समेत 10 माओवादियों ने बंदूक का रास्ता छोड़ संविधान की किताब थामी।

HighLights

  1. 25 लाख के चैतु समेत 10 इनामी माओवादियों का समर्पण
  2. बस्तर में 161 माओवादियों ने 10 दिनों में छोड़ा हथियार
  3. MMC जोन में 1 जनवरी को सामूहिक हथियार छोड़ने की घोषणा

अनिमेष पाल, नईदुनिया, जगदलपुर: बस्तर में माओवादी हिंसा के चार दशक लंबे इतिहास में पहली बार परिस्थितियां इतनी तेज़ी से बदलती दिख रही हैं। दंडकारण्य के सबसे खतरनाक और दबदबा रखने वाले कमांडर हिड़मा की मुठभेड़ में मौत, उसके बाद शीर्ष नेताओं भूपति और रूपेश का सरेंडर, इन घटनाओं ने माओवादी संगठन को भीतर तक हिला दिया है।

इसका नतीजा ये है कि पिछले मात्र 10 दिनों में तीन करोड़ रुपये से अधिक के इनामी 161 माओवादियों ने सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और तेलंगाना क्षेत्रों में हथियार डाल दिए हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे बस्तर की धरती पर उभरती ‘आत्मसमर्पण की सुनामी’ बता रही हैं, जो माओवादी आंदोलन के इतिहास में अभूतपूर्व है।


एमएमसी जोन की घोषणा: 1 जनवरी को छोड़ेंगे हथियार

इन तेजी से बदलते हालातों के बीच, महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) स्पेशल जोनल कमेटी की ओर से आए नए संदेश ने माओवादी संगठन के अंदर फूट और विचलन को स्पष्ट कर दिया है। संगठन के प्रवक्ता ‘अनंत’ ने पत्र और आडियो संदेश के माध्यम से 1 जनवरी 2026 को सामूहिक सरेंडर की घोषणा की है। इससे पहले फरवरी तक का समय मांगा गया था, लेकिन छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा की प्रतिक्रिया के बाद माओवादियों ने तारीख घटाकर 1 जनवरी कर दी।

संदेश में कैडरों से कहा गया है कि किसी अभियान में शामिल न हों, आंतरिक संपर्क बनाए रखें और रोजाना 435.715 फ्रीक्वेंसी पर सुबह 11 से 11.15 बजे तक जुड़े रहें। अनंत का बयान इस बात को स्वीकार करता है कि बदलती राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां, विश्वासनीय नेतृत्व का अभाव और विचारधारात्मक सम्मोहन का टूटना संगठन की जड़ों को खा चुका है।

उन्होंने सरेंडर के लिए तीनों राज्यों-छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश से 1 जनवरी 2026 तक अभियान रोकने की मांग की है। माओवादियों ने चेतावनी भी दी है कि यदि गिरफ्तारियां व मुठभेड़ जारी रहीं तो सामूहिक आत्मसमर्पण प्रभावित होगा। लगातर बयान से संकेत मिलता है कि माओवादी अब ऐसे राज्य में समर्पण करना चाहेंगे जो सबसे अधिक सहयोग करेगा।

आंतरिक पतन वजह

माओवादी मामलों के जमीनी पत्रकार विकास तिवारी बताते हैं कि मआोवादियों की मुख्यधारा में वापसी सुरक्षा बलों के दबाव के साथ ही माओवादी प्रमुख बसवा राजू, हिड़मा जैसे माओवादियों की मृत्यु के बाद उपजे नेतृत्व का संकट का परिणाम है, जिसने कैडरों का मनोबल तोड़ दिया है।

65 लाख के इनामी 10 माओवादी लौटे मुख्यधारा में

'आत्मसमर्पण की सुनामी' के बीच बुधवार को बस्तर में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के कुख्यात नेता, 25 लाख रुपये के इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा ने नौ अन्य साथियों के साथ शस्त्र छोड़ दिया। कुल 65 लाख रुपये के इनामी ये 10 माओवादी अब पुनर्वास से पुर्नजीवन की राह पर हैं। 63 वर्षीय चैतू, जो 1985 से संगठन में सक्रिय था, झीरम घाटी हमले में शामिल रहने वाले दरभा डिविजन का प्रभारी था। उसका आत्मसमर्पण माओवादी ढांचे के लिए बड़ा झटका है।

इसके अलावा आठ लाख का इनामी डीवीसीएम सरोज, पांच-पांच के इनामी एसीएम भूपेश, प्रकाश, कमलेश, जन्नी, संतोष, रामशीला व एक-एक लाख के पार्टी सदस्य नवीन, जयंति ने शौर्य भवन, पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी., एसपी शलभ सिन्हा, सीआरपीएफ व एसटीएफ के अधिकारियों और आदिवासी समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि की उपस्थिति में हथियार छोड़कर संविधान की किताब थामी।

यह भी पढ़ें- पूना मारगेम से बस्तर में नई राह, एक करोड़ 19 लाख के 41 इनामी माआवादियों ने किया सरेंडर

भूपति और रूपेश के फैसलों ने सोचने पर किया मजबूर

मुख्यधारा में लौटते समय चैतू ने कहा कि भूपति और रूपेश के फैसलों ने हमें सोचने पर मजबूर किया। अब हथियारों की लड़ाई का समय नहीं रहा, इसलिए लौट आया हूं। शीर्ष पुर्नवासित माओवादी रुपेश ने भी चैतू के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि बाकी कैडर भी जंगल से निकलकर जीवन चुनें।

आइजी सुंदरराज पी. ने कहा कि संगठन का प्रभाव तेजी से समाप्त हो रहा है और क्षेत्र में शांति व विकास का नया अध्याय खुल रहा है। उन्होंने पोलित ब्यूरो सदस्य देवजी, सीसी सदस्य रामदर, और डीकेएसजेडसी सदस्य पापाराव से भी लौटने की अपील की।