
नईदुनिया प्रतिनिधि, जांजगीर-चांपा। जिले में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर गांव-गांव तक पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि कई जगहों पर पानी की टंकियां तो बन गईं, पर उनमें पानी नहीं पहुंच पा रही है। करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से संचालित इस योजना के तहत जिले के 424 गांवों में घर-घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि लगभग 50 प्रतिशत गांवों में आज भी लोगों को नियमित जल आपूर्ति नहीं मिल रही है।
देवरी, तनौद, भुई गांव, खोखरा सहित कई गांवों में टंकियों का निर्माण तो पूरा हुआ मगर पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा है। वहीं कई गांव ऐसे हैं जहां टंकी का निर्माण भी नहीं हो सका है। जहां पाइपलाइन बिछाई गई है, वहां भी लीकेज और खराब रखरखाव के कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर टंकियां शोपीस बनकर रह गई हैं और ग्रामीणों को अब भी हैंडपंप या अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें- 'आवा पानी झोंकी' अभियान जिसने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की बदल दी तकदीर, पीएम मोदी भी इसके हुए मुरीद
योजना में ठेकेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि काम की गुणवत्ता में भारी कमी रही है, जिससे कई परियोजनाएं शुरू होने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही हैं। वहीं, अधिकारियों की निगरानी भी कमजोर बताई जा रही है, जिसके चलते करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।