
नईदुनिया प्रतिनिधि, जशपुर। जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत पीठाआमा में 10 तारीख की दोपहर अचानक आए भयंकर आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई है। दोपहर 2रू00 से 3रू00 बजे के बीच आए इस तूफान से सुखवासुपारा मोहल्ले सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
दर्जनों मकानों के शेड हवा में उड़ गए, कई पुराने विशाल पेड़ धराशाई हो गए और एक स्थानीय राइस मिल को करोड़ों रुपये की भारी आर्थिक चपत लगी है। इसके साथ ही, किसानों की तैयार हो रही फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सुखवासुपारा में कई दर्जनों मकानों के शेड और छप्पर हवा में तिनके की तरह उड़ गए।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सुखवासी पारा निवासी लुथरो राम तुर्री, रोशन मरियानुस खड़िया और मंगल साय सहित कई अन्य ग्रामीणों के मकानों की छतें उड़ गई हैं, जिससे उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम कुकराझार, ईमली पारा,तुरीपारा घरों के नुकसान के साथ-साथ प्राकृतिक संपदा को भी भारी क्षति पहुंची है। आंधी के प्रचंड वेग के कारण इलाके में लगे इमली, महुआ, कोसम, साजा और आम के बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़ कर धराशाई हो गए, जिससे कई रास्ते भी बाधित हुए हैं।
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इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय राइस मिलर श्श्री श्याम एग्रोटेकश् को भुगतना पड़ा है। तूफान के कारण मिल परिसर का विशालकाय नीले रंग का टिन शेड लोहे के मजबूत एंगल्स सहित पूरी तरह से उखड़ कर दूर जा गिरा। मिल के अंदर का दृश्य तबाही की गवाही दे रहा है, जहां छत के परखच्चे उड़ चुके हैं और अंदर लगी भारी मशीनरी तथा अनाज सीधे खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
छत उड़ जाने की वजह से मिल के अंदर और बाहर रखा भारी मात्रा में धान और चावल मौसम की मार और बारिश से पूरी तरह खराब हो गया है। राइस मिल के संचालक राहुल निंगानिया ने इस भयंकर तबाही पर चिंता जताते हुए बताया कि शेड के पूरी तरह उड़ जाने और स्टॉक में रखे धान व चावल के खराब होने से उन्हें करोड़ों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। करोड़ों के इस अचानक हुए नुकसान ने मिल प्रबंधन को गहरे संकट में डाल दिया है।
फसल को हुए नुकसान से किसानों के माथे पर खिंची चिंता की लकीरें
इस आंधी-तूफान ने केवल मकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को ही नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों को भी गहरी चोट पहुंचाई है। तेज हवाओं और बारिश के कारण क्षेत्र के कई एकड़ में खड़ी धान की फसल खेतों में ही सो (बिछ) गई है।
फसल के इस तरह जमीन पर गिर जाने से दाने खराब होने और पैदावार में भारी कमी आने की आशंका पैदा हो गई है। मेहनत से उगाई गई फसल को यूं आंखों के सामने बर्बाद होते देख किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।
इस प्राकृतिक आपदा से पीठाआमा ग्राम पंचायत के ग्रामीण, किसान और व्यवसायी सभी सदमे में हैं। प्रभावित परिवारों, किसानों और राइस मिल संचालक को अब स्थानीय प्रशासन से जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजे व राहत प्रदान करने की उम्मीद है, ताकि वे इस दोहरी त्रासदी से दोबारा उबर सकें।