जशपुरनगर। देश और समाज में जाति और धर्म के बंधन को तोड़ कर प्रेमी जोड़े के एक होने की खबर तो आपने बहुत पढ़ी और देखी होगी। लेकिन दिव्यांग संदीप और अफसाना की यह प्रेम कहानी,इन सबसे अलग हट कर है।

शहर के सरनाटोली का निवासी संदीप दोनों आंखों की रोशनी बचपन में ही चली गई थी,वहीं दुलदुला निवासी अफसाना को उसके कद ने धोखा दे दिया था। दोनों दिव्यांग अपने परिवार के साथ रह कर अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। आंखों की रोशनी ना होने से संदीप स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच सका,वहीं अफसाना किसी तरह 9 वीं कक्षा तक की पढ़ाई कर सकी।

इन दोनों दिव्यांगों को रब ने तकरीबन 4 माह पहले अनोखे तरीके से मिलाया। संदीप ने बताया कि वह अपने घर के मोबाइल में समय व्यतीत करने के लिए खेल रहा था। इसी दौरान गलती से अफसना के मोबाइल का नम्बर उससे डायल हो गया। अफसाना से बात करके उसे इतना अच्छा लगा कि वह अक्सर उससे बात करने लगा।

बातों बातों में दोनों प्रेम के बंधन में बंध कर शादी करने का निर्णय ले लिया। लेकिन इस दिव्यांग प्रेमी जोड़े के रास्ते में भी धर्म की दीवार आ गई। दोनों ने जब अपने परिजनों को अपने इरादे बताए तो मानो तूफान आ गया। संदीप और अफसाना के परिजन धर्म की दुहाई देते हुए विरोध करने लगे। लेकिन अफसाना को अपनाने के जूनन में संदीप उसके घर जा पहुंचा।

यहां परिजनों के विरोध के बावजूद उसे अपने साथ लेकर जशपुर आ गया। जशपुर पहुंचने पर संदीप के परिवार ने सिर को आसमान में उठा लिया। लेकिन दोनों ने शपथ पत्र के माध्यम से विवाह रचा लिया। इस पर संदीप के परिवार ने उसे अपने से अलग कर दिया है।

विवाह के बंधन में बंध चुका यह दिव्यांग प्रेमी जोड़ा अपनी शादी को कानूनी रूप देने और दो जून की रोटी जुटाने के लिए संघर्ष कर रहा है। संदीप का कहना है कि कोर्ट मैरिज करने के लिए दो गवाह उसे नहीं मिल रहे हैं। जब तक कोर्ट मैरिज नहीं हो जाती तब तक अंर्तजातिय विवाह के लिए मिलने वाला शासकीय योजना का लाभ इन्हें नहीं मिल सकता।

परिवार से बाहर हो चुके इस दिव्यांग जोड़ी के सामने सबसे बड़ी समस्या पेट भरने की है। फिलहाल अपने जमा पूंजी और परिवार से मिलने वाले राशन से गुजारा हो रहा है। लेकिन यह दिव्यांग जोड़ी अपने पैरों पर खड़ा हो कर आत्मसम्मान का जीवन जीना चाहते है।

Posted By: Sandeep Chourey