लड़खड़ाया और पल भर में तोड़ दिया दम, जशपुर में शिकारियों का जाल या कोई और साजिश?
जशपुर जिले के दुलदुला वन परिक्षेत्र के नोनपानी जंगल में एक 15 वर्षीय नर हाथी का शव मिला है। वन विभाग ने फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड के साथ मामले की ज...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 07:01:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 07:01:33 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- जशपुर के दुलदुला रेंज स्थित नोनपानी जंगल में मिला नर हाथी का शव।
- अंबिकापुर से पहुंची फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड की टीम, शिकार की आशंका पर भी नजर।
- डीएफओ शशि कुमार ने बताया कि मौत के कारणों का खुलासा पीएम रिपोर्ट के बाद होगा।
नईदुनिया प्रतिनिधि,जशपुरनगरः जिले के दुलदुला वन परिक्षेत्र के नोनपानी के जंगल में एक नर हाथी का शव वन विभाग ने बरामद किया है। ग्रामीणों के अनुसार गुरूवार की सुबह इस नर हाथी को जंगल में देखा गया था। अचानक यह लड़खड़ाते हुए गिरकर मर गया। घटना की सूचना पर डीएफओ शशि कुमार सहित वनविभाग के आला अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
डीएफओ सिंह ने मिडिया को बताया कि मृत हाथी की आयु 15 साल के आसपास होने का अनुमान है। उन्होनें कहा कि हाथी की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएगा। इस बीच युवा हाथी की मौत के मामले की जांच के लिए अंबिकापुर से वनविभाग के फोरेंसिक विभाग के साथ डाग स्क्वायड की टीम भी मौके पर पहुंच गई है। विभाग के अधिकारी व कर्मचारी घटना स्थल के आसपास के साथ जंगल की सुक्ष्मता से जांच कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार नोनपानी के जंगल में जंगली सुअर के शिकार की घटना पूर्व मे होती है।
शिकारी करंट और विष का प्रयोग कर सुअरो का शिकार करते रहे हैं। इसे देखते हुए विभाग हाथी की मौत के गहराई से जांच करने में जुटा हुआ है। उल्लेखनीय है कि जशपुर जिला प्रदेश के सर्वाधिक हाथी प्रभावित जिलों में शामिल है। ओडिसा और झारखंड की ओर से हाथी यहां प्रवेश करते हैं।
जिले के 8 में से 6 विकासखंड घोर हाथी प्रभावित क्षेत्र में शामिल है। इनमें से दुलदुला और तपकरा वन परिक्षेत्र में लगभग साल के बारह महिने हाथियों की हलचल दर्ज की जाती है। इससे जनहानि व संपत्ति हानि का आंकड़ा गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। इसे नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 80 के दशक से लेकर अब तक कई प्रयोग किए हैं। इनमें महिला हाथी विशेषज्ञ पार्वती बरूआ के सहयोग से हाथियों को साथी बनाने का प्रयास 80 के दशक में किया गया था,जो सफल नहीं हो पाया था। इसके बाद वन क्षेत्र में सोलर वायर लगाकर हाथियों को जंगल के अंदर रोकने का प्रयास किया गया।
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लेकिन हाथियों ने पेड़ों की डाली से इस फेसिंग को तहस नहस कर दिया। इस प्रयोग के बाद सरकार ने जीआई वायर फेसिंग का प्रयोग करते हुए,हाथियों के हलचल के आसपास के घरों को फेसिंग वायर से घेर कर सुरक्षित करने के साथ ही जागरूकता अभियान चला रही है। जागरूकता के दौरान वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी ग्रामीणों को हाथियों के बीच सुरक्षित तरीके से रहने के तरीके की जानकारी दे रहे हैं। इसका कुछ अच्छा परिणाम सामने आया है।
जिले में बीते दो-तीन सालों में जनहानि का आंकड़ा कम दर्ज किया गया है। जिले में होते रही है हाथियों की मौत दुलदुला से पहले भी जिले में हाथियों की मौत की घटनाएं होती रही है। जिले का सबसे चर्चित घटना तपकरा रेंज में हुई थी। यहां एक ग्रामीण ने अपने परिवार को हाथियों के हमले से सुरक्षित रखने के लिए घर के चारों ओर लोहे की तार की बाड़ लगा कर उसमें करंट प्रवाहित कर दिया था।
रात में आए एक हाथी की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इस मामले में वन विभाग ने कानूनी कार्रवाई करते हुए ग्रामीण को गिरफ्तार भी किया था। इसी प्रकार पत्थलगांव,कांसाबेल वन परिक्षेत्र में पूर्व में विद्युत आपूर्ति तार में प्रवाहित करंट की चपेट में आने से हाथियों के मारे जाने की घटनाएं हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने तारों की उंचाई बढ़ाने की कार्रवाई की थी।
वर्जन
दुलदुला के नोनपानी के जंगल से एक नर हाथी का शव बरामद किया गया है। हाथी की पीएम रिपोर्ट से मृत्यु का कारण स्पष्ट हो सकेगा। मामले की जांच जारी है।
-शशि कुमार,डीएफओ,जशपुर।