• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • कांकेर

कभी गुलेल से करते थे शिकार, अब पर्यटकों को करवा रहे सैर; 300 से अधिक आदिवासी युवाओं को मिला रोजगार

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन की ओर से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने और पर्यावरण सरंक्षण को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। विभाग ने क्षेत्...और पढ़ें

By Ritesh PandeyEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Tue, 06 Jan 2026 05:38:47 AM (IST)Updated Date: Tue, 06 Jan 2026 05:41:36 AM (IST)
कभी गुलेल से करते थे शिकार, अब पर्यटकों को करवा रहे सैर;  300 से अधिक आदिवासी युवाओं को मिला रोजगार
प्रशिक्षण के बाद गाइड बने युवा-युवती

HighLights

  1. विभाग की पहल से आदिवासी युवाओं को मिला रोजगार
  2. पर्यटन की संभावनाओं के चलते इन्हें गाइड की ट्रेनिंग दी गई
  3. युवा प्रत्येक माह 15 से 25 हजार रूपये की आमदनी कर रहे

रीतेश पांडेय, नईदुनिया, जगदलपुर: कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान यहां अवस्थित दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के मुक्त रहवास, चित्ताकर्षक गुफाओं व जल प्रपात के कारण देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान रखता है। 200 वर्ग किलोमीटर में विस्तारित उद्यान क्षेत्र में स्थित वन्य ग्रामों में पक्षियों व वन्यजीवों का शिकार आदिवासी युवाओं के लिए शौक व परपंरा का हिस्सा रहा है।

वन विभाग ने इन्हें सकारात्मक दिशा की ओर उन्मुख करने व रोजगार से जोड़ने के लिए अभिनव पहल की है। पर्यटन की अपार संभावनाओं के चलते इन्हें गाइड की ट्रेनिंग दी गई। साथ ही इको विकास समिति का गठन कर इन्हें पेट्रोल चलित जिप्सियां प्रदान की गईं। वर्तमान में पूरे उद्यान क्षेत्र में 300 से अधिक आदिवासी युवक-युवतियां गाइड व जिप्सी ड्राइवर के रूप में प्रत्येक माह 15 से 25 हजार रूपये की आमदनी कर रहे हैं।


वन विभाग के उद्यान प्रभाग ने युवाओं की ओर से वन्य जीवों के शिकार व वनों की अवैध कटाई जैसे गतिविधियों को रोकने के लिए ईको टूरिज्म की योजना बनाई। इसके तहत दशक भर पहले मारुति कंपनी से करार कर विशेष रूप से पेट्रोल चलित 35 जिप्सियां खरीदी गईं। ताकि वेली एरिया में प्रदूषण का स्तर न्यून रहे।

यह भी पढ़ें- कांगेर घाटी में मिली अनोखी ‘Green Cave’, हरे रंग की विशेष आकृति बनी आकर्षण का केंद्र

विभाग ने युवक-युवतियों को गाइड का काम सिखाया

स्थानीय आदिवासी युवाओं को जोड़कर गठित इको विकास समिति को यह वाहनें हस्तगत की गईं। साथ ही ही समिति के माध्यम से विभाग ने युवक-युवतियों को गाइड का काम भी सिखाया। वर्तमान में यह जिप्सी ड्राइवर व गाइड कोटमसर, कैलाश गुफा, तीरथगढ़, धुड़मारास आदि पर्यटक स्थलों में सैलानियों को सैर करवाकर उन्हें यहां से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध करवाते हैं।

एक पंथ-दो काज

इन्हें हर माह 15 से 25 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इस प्रकार विभाग ने एक पंथ दो काज के कहावत को सार्थक करते हुए इन आदिवासी युवाओं को रोजगार से जोड़ा है। इससे जैव विविधता व पार्क में मौजूद कई प्रजातियों के वन्य जीवों का संरक्षण भी आसान हुआ है।

विभाग की ओर से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने उन्हें गाइड की ट्रेनिंग दी गई। साथ ही जिप्सी भी दी गई है। इको विकास समिति की ओर से इसका बेहतर संचालन हो रहा है। इस योजना से वन्य व वन्य जीव संरक्षण की दिशा में भी काफी हद तक सफलता मिली है।

-नवीन कुमार, संचालक, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान