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कवर्धा में किसानों ने सड़क पर खींची लकीर, 1200 ट्रैक्टर, 8000 किसान, 23 मांगों पर सरकार को आर-पार की चेतावनी, नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन आंदोलन

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में खेती-किसानी से जुड़े 23 मुद्दों को लेकर किसानों ने बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है। 'बलराम किसान न्याय यात्रा' के तहत लगभग 8 ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 08:57:02 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 08:57:02 PM (IST)
कवर्धा में किसानों ने सड़क पर खींची लकीर, 1200 ट्रैक्टर, 8000 किसान, 23 मांगों पर सरकार को आर-पार की चेतावनी, नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन आंदोलन
कवर्धा में किसानों का सड़क पर शक्ति प्रदर्शन: रामधुनी के साथ सरकार को दिया मांगों का अल्टीमेटम।

HighLights

  1. कवर्धा में हजारों किसानों ने दिखाया एकजुटता का दम।
  2. सड़कों पर उतरी ट्रैक्टरों की फौज, प्रशासन में मचा हड़कंप।
  3. किसानों की 'बलराम किसान न्याय यात्रा' से शहर में यातायात प्रभावित।

नईदुनिया प्रतिनिधि, कवर्धा : कवर्धा में किसानों का प्रदर्शन इस बार केवल सड़क पर भीड़ जुटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेती से जुड़े 23 मुद्दों को एक साथ सामने लाकर सरकार के सामने मांगों का बड़ा एजेंडा रखा गया। बलराम किसान न्याय यात्रा में 8 हजार से अधिक किसान और करीब 1200 ट्रैक्टर पहुंचे।

किसानों ने गन्ने के उचित दाम, धान के मूल्य, सिंचाई, फसल बीमा, लंबित भुगतान और आवारा मवेशियों सहित कई मुद्दों पर तत्काल निर्णय की मांग की। प्रदर्शन का असर शहर से बाहर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी दिखाई दिया।


गन्ने के दाम और किसानों के भुगतान का सवाल

किसानों ने गन्ने पर 150 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की मांग रखी। गन्ना खरीदी का मूल्य 5500 रुपए प्रति क्विंटल करने, कृषक उन्नति योजना के तहत बागवानी और गन्ना किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ वार्षिक सहायता देने की मांग भी शामिल रही। धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3100 रुपए करने और लंबित चौथी किस्त का भुगतान करने की मांग भी किसानों ने उठाई।

नहर और बांधों को लेकर नाराजगी

किसानों के एजेंडे में सिंचाई का मुद्दा प्रमुख रहा। सुतियापाठ और पिलारी नहर से जुड़े कार्यों के साथ जगमड़वा, बरौदा खुर्द, घाटीला, चिरपानी और सरईपतेरा क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को लेकर मांग रखी गई। हाफ नदी डायवर्सन, घोसरा, नेवारी और करियाआमा बांध से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की मांग भी की गई। किसानों का कहना है कि खेती का उत्पादन केवल बीज और खाद से नहीं, बल्कि भरोसेमंद सिंचाई व्यवस्था से तय होता है।

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दोनों शक्कर कारखानों की क्षमता बढ़ाने की मांग

क्षेत्र के गन्ना किसानों ने दोनों सहकारी शक्कर कारखानों की क्षमता बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया। गन्ना फसल का बीमा कराने, एसवी पटेल सहकारी शक्कर कारखाने से संबंधित भुगतान की समस्या दूर करने और कवर्धा में क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की मांग की गई। इससे किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका मुद्दा केवल एक सीजन के भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी गन्ना व्यवस्था से जुड़ा है।

धान खरीदी की तौल से आवारा मवेशियों तक

धान खरीदी में 40.700 किलोग्राम की मानक तौल सुनिश्चित करने और आवारा मवेशियों के पुनर्वास की मांग भी रखी गई। इसके अलावा नायब तहसीलदार प्रेम नारायण साहू के स्थानांतरण की मांग ज्ञापन में शामिल रही। इस तरह कृषि संबंधी मांगों के साथ स्थानीय प्रशासन से जुड़े मुद्दे भी आंदोलन के एजेंडे का हिस्सा बने।

तीन स्थानों पर रामधुनी, गांवों से आया अपना इंतजाम

यात्रा के दौरान लोहारा रोड-रायपुर बायपास, बिलासपुर रोड जोराताल चौक और रायपुर रोड पर सागर मोबाइल के पास रामधुनी की गई। अलग-अलग गांवों से पहुंचे किसानों ने अपनी संख्या के अनुसार राशन और पानी का इंतजाम स्वयं किया। कुछ समूह बड़े प्लास्टिक टैंकों में पानी लेकर पहुंचे। प्रदर्शन के कारण शहर से बाहर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। किसानों ने कहा कि मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

सकारात्मक पहल नहीं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन

भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी ने कहा कि किसानों की मांगें केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं हैं। सरकार को गन्ना किसानों के भुगतान, उचित मूल्य, सिंचाई परियोजनाओं और लंबित मुआवजे पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए। सकारात्मक पहल नहीं हुई तो किसान अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए तैयार हैं।