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एम्बुलेंस के पैसे नहीं थे, तो बाइक पर लकड़ी की पटरी बिछाकर पत्नी को 140 KM दूर एम्स ले गया पति, Video वायरल

CG News: कपूरा बाई के दोनों पैर काम नहीं करते हैं और उनकी स्थिति ऐसी है कि वह बैठ भी नहीं सकतीं। समलू के सामने सबसे बड़ी चुनौती पत्नी को रायपुर स्थित ए...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 06:14:45 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 06:14:45 PM (IST)
एम्बुलेंस के पैसे नहीं थे, तो बाइक पर लकड़ी की पटरी बिछाकर पत्नी को 140 KM दूर एम्स ले गया पति, Video वायरल
पत्नी को बाइक पर लिटाकर 140 किमी दूर एम्स ले गया पति।

HighLights

  1. गरीबी पर भारी पड़ा 'सिंदूर' का प्यार
  2. एम्स जाने के लिए बाइक पर ही बनाया बिस्तर
  3. रेंगाखार से अहिवारा तक का कठिन सफर

नईदुनिया प्रतिनिधि, नंदिनी। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और जीवनसाथी का साथ हो, तो विषम परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। कबीरधाम जिले के एक छोटे से गांव रेंगाखार के रहने वाले समलू मरकाम ने इसे सच कर दिखाया है। आर्थिक तंगी और संसाधनों के अभाव के बावजूद, समलू अपनी बीमार पत्नी कपूरा बाई को बेहतर इलाज दिलाने के लिए बाइक से ही 140 किलोमीटर लंबे सफर पर निकल पड़ा।

बाइक पर तैयार किया 'चलता-फिरता बिस्तर'

कपूरा बाई के दोनों पैर काम नहीं करते हैं और उनकी स्थिति ऐसी है कि वह बैठ भी नहीं सकतीं। समलू के सामने सबसे बड़ी चुनौती पत्नी को रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) अस्पताल तक पहुंचाने की थी। कबीरधाम से रायपुर की दूरी लगभग 140 किलोमीटर है। आर्थिक रूप से कमजोर समलू के पास न तो एम्बुलेंस बुलाने के पैसे थे और न ही वह कोई चार पहिया वाहन किराए पर ले सकता था। यात्री बस में पत्नी की हालत और भीड़ को देखते हुए उसने एक जोखिम भरा लेकिन साहसी निर्णय लिया। उसने अपनी बाइक की पिछली सीट पर लकड़ी की एक लंबी पटरी (पटरा) बांधी और उसे एक छोटी खाट का रूप दे दिया, ताकि पत्नी उस पर लेटकर सफर कर सके।


अहिवारा में हैरान रह गए राहगीर

जब यह अनोखी 'बाइक एम्बुलेंस' साढ़े नौ बजे के करीब अहिवारा पहुंची, तो सड़क पर चलने वाले लोग दंग रह गए। बाइक की सीट पर एक महिला को लेटे हुए देख राहगीरों ने समलू को रोका। पूछताछ करने पर जब उसकी मजबूरी और जज्बे की कहानी सामने आई, तो लोगों की आंखें नम हो गईं। समलू ने बताया कि कबीरधाम में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर एम्स जाने की सलाह दी थी। पत्नी को दर्द से बचाने के लिए उसने यह तरीका निकाला।

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मानवता ने बढ़ाया मदद का हाथ

सफर के दौरान अहिवारा में जब समलू रुका, तो वहां मौजूद लोगों ने न केवल उसके हौसले की सराहना की, बल्कि अपनी ओर से आर्थिक सहयोग भी किया। पांच घंटे से अधिक के इस थका देने वाले सफर में समलू के चेहरे पर थकान से ज्यादा पत्नी को ठीक कराने की उम्मीद दिखाई दे रही थी। आर्थिक कमजोरी के बीच एक पति का यह संघर्ष अब चर्चा का विषय बना हुआ है।