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कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जिले का मॉडल सोलर विलेज राज्य और देश के लिए उदाहरण बन सके। योजना के तहत जिले के 10 गांवों का चयन कर उनमें निर्धारित अवधि के भीतर प्रतिस्पर्धा कराई जाएगी। इन गांवों में सौर ऊर्जा से जुड़े कार्यों की प्रगति, जनभागीदारी और जागरूकता के आधार पर एक गांव को मॉडल सोलर विलेज के लिए चुना जाएगा। चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मापदंड आधारित होगी। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और बिजली पर निर्भरता कम करना है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि एमएनआरई (MNRE) द्वारा प्रत्येक जिले में एक मॉडल सोलर विलेज विकसित करने का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए लगभग एक करोड़ रुपये की राशि निर्धारित है। योजना के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा राजस्व ग्रामों का चयन किया जाएगा। चयनित ग्राम पंचायत में ग्राम स्तर पर 'आदर्श ग्राम समिति' का गठन होगा, जिसमें सरपंच, सचिव, पंच, शिक्षक, डॉक्टर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य शासकीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।
योजना के तहत ग्राम समिति द्वारा ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं जैसे पीएम सूर्यघर, पीएम कुसुम, सौर सुजला और जल जीवन मिशन की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही गांव के सार्वजनिक स्थलों जैसे पेयजल व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सौर संयंत्र स्थापना के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
चयनित गांवों में अधिकतम छह माह तक यह प्रतिस्पर्धा चलेगी। इसके बाद जिला स्तरीय समिति द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा। जिस गांव में सर्वाधिक संख्या में सौर संयंत्र स्थापित होंगे, उसे 'मॉडल सोलर विलेज' के रूप में चुना जाएगा। चयन के बाद उस गांव का विस्तृत डीपीआर (DPR) तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। कलेक्टर ने कहा कि सौर ऊर्जा आधारित यह गांव स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास का जीवंत उदाहरण बनेगा।
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