कोरबा: संतान नहीं होने पर टूटा 11 साल का रिश्ता, तलाक की बात से परेशान पति ने ससुराल के पास जहर खाकर दी जान
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बेहद दर्दनाक और मार्मिक मामला सामने आया है, जहाँ पारिवारिक कलह और तलाक से आहत एक पति ने जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त क...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 03:42:12 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 03:42:12 PM (IST)
राजू केंवट, फाइल फोटोHighLights
- कोरबा में पारिवारिक विवाद का खौफनाक अंत।
- पारिवारिक कलह और शराब की लत बनी जानलेवा।
- स्वजन को शव ले जाने के लिए करना पड़ा संघर्ष।
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा : पत्नी से तलाक की बात और लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद के बीच एक व्यक्ति ने जहर खा लिया। गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराए गए राजू केंवट (40) की 14 दिन तक उपचार के बाद गुरुवार को मौत हो गई। घटना के बाद स्वजन ने शव को घर ले जाने में निजी एंबुलेंस चालक द्वारा 700 रुपये मांगे जाने का आरोप लगाया।
बताया जा रहा है कि राजू की शादी वर्ष 2014 में मनोरथ केंवट (36) के साथ हुई थी। शादी के 11 वर्ष बाद भी दोनों की कोई संतान नहीं थी। स्वजन के मुताबिक इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। राजू के शराब पीने को लेकर भी दोनों के बीच आए दिन कहासुनी होती थी। रक्षाबंधन से एक दिन पहले हुए विवाद के बाद मनोरथ अपने मायके चली गई थी। बाद में राजू ने उसे कोरबा बुलाया।
23 सितंबर को दोनों ने आपसी सहमति से तलाक को लेकर स्टांप पेपर पर लिखापढ़ी की। इसके बाद मनोरथ मायके लौट गई। अगले दिन 24 सितंबर को राजू ने कोरबा से जहर खरीदा और करतला क्षेत्र के केराकछार गांव के पास स्थित अपने ससुराल के नजदीक पहुंचा। वहां उसने जहर का सेवन कर लिया। सड़क किनारे उसके पड़े होने की जानकारी मिलने पर उसे अस्पताल पहुंचाया गया। मेडिकल कालेज अस्पताल में उपचार के दौरान आठ अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।
यह भी पढ़ें- ट्रेन में शराबी का मौत का खेल, चांदाफोर्ट से गोंदिया तक दहशत के 4 घंटे, वेनगंगा एक्सप्रेस 2 घंटे 42 मिनट लेट
मुक्तांजलि वाहन मिलने में हुई देरी
स्वजन ने बताया कि मौत के बाद शव को घर ले जाने के लिए मर्च्यूरी के बाहर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। उस समय सरकारी मुक्तांजलि वाहन उपलब्ध नहीं था। वहां मौजूद निजी एंबुलेंस चालक ने कोरबा से पुरानी बस्ती तक शव पहुंचाने के लिए 700 रुपये की मांग की। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण स्वजन राशि देने में असमर्थ थे और शव को कंधे पर ले जाने की तैयारी करने लगे।
इसी बीच स्वजन ने मुक्तांजलि वाहन के चालक से संपर्क किया। करीब 10 मिनट बाद वाहन पहुंच गया और शव को घर ले जाया गया। स्वजन का आरोप है कि वाहन उपलब्ध होने के बाद एक व्यक्ति ने चालक को दो सौ रुपये खर्चा-पानी देने की बात कही। स्वजन के विरोध के बाद मामला शांत हो गया।