
कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ब्लैक स्मिथ कंपनी इन दिनों कराईनारा गांव में सोन नदी के निकट राख डंप कर रही। पर्यटन स्थल होने के बावजूद सतरेंगा में इस ट्रांसपोर्ट कंपनी को राख डंप करने की अनुमति प्रशासनिक तौर पर प्रदान की गई है। वहां डंप करने की जगह कंपनी यहां- वहां रिहाइशी इलाकों में राख गिरा रही। इसकी वजह से क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा। बेहद गंभीर बात यह है कि शिकायत किए जाने पर ही केवल नोटिस की औपचारिकता पूरी कर प्रशासनिक अधिकारी अपना कर्तव्य पूरा कर लेते हैं।
राखड़ ट्रांसपोर्टिंग कंपनी ब्लैक स्मिथ पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा कसने लगा है। निहारिका स्थित कंपनी के कार्यालय में पूरे दिन चली जांच पड़ताल के बाद ईडी की टीम लौट गई, पर जांच की राडार पर यह कंपनी आ चुकी है। यहां बताना होगा कि वर्ष 2020 से कोरबा के संयंत्रों से निकलने वाले राख का परिवहन का काम यह कंपनी कर रही है। नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए राखड़ नदी, नाले व रिहाइशी क्षेत्रों में धडल्ले से डंप किया जा रहा। बताया जा रहा है कि वर्ष 2021-22 में पर्यटन स्थल सतरेंगा के कुछ आदिवासियों की करीब 35 एकड़ जमीन में राखड़ डंप करने की अनुमति पर्यावरण संरक्षण विभाग व अनुविभागीय दंडाधिकारी विभाग ने प्रदान की है। हैरत तो यह है कि एक तरफ सतरेंगा को न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन क्षेत्र के रूप में पहचान दिलाई जा रही। वहीं यहां राख डंप कर जल व वायु प्रदूषण की परवाह किए बिना राख डंप करने की अनुमति प्रदान कर दी गई। इसका स्वाभाविक है, यही वजह है कि राख यहां डंप करने की जगह अलग- अलग स्थानों में सरकारी जमीनों में राख का ढेर लगाया जा रहा। वर्तमान में कोरबा- चांपा मार्ग में मड़वारानी के पास ग्राम कराईनारा में सोन नदी से 50 मीटर दूर राख पाट कर कंपनी ने राखड़ डैम बना दिया है। जबकि किसी भी नदी नाले व जल स्त्रोत से कम से कम 500 मीटर की दूरी होनी चाहिए। खुले स्थान पर राख का भंडारण किए जाने की वजह से आसपास के रिहाइशी क्षेत्र में राख हवा से उड़ कर पहुंच रहा। वहीं सोन नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा।
30 किमी का अनुबंध आठ में कर रहे डंप
बाल्को से सतरेंगा की दूरी करीब 30 किलोमीटर है। इस दृष्टि से 450 रूपये प्रति टन राख के हिसाब से कंपनी को प्रबंधन भुगतान कर रही है। सतरेंगा में राख डंप नहीं किया जा सकता। इसलिए लगभग आठ किलोमीटर दूर डिंगापुर के पास वन विभाग की 60 एकड़ भूमि में धडल्ले से राख डंप किया जा रहा। यहां 12 और 14 चक्का हाइवा 24 घंटे दौड़ रही। एक हाईवा में 45 से 55 टन राख लोड किया जा रहा। ये ओवहरलोड गाड़ियां शहर के मुख्य मार्गों से गुजर रही। इसके बावजूद न तो यातायात विभाग कार्रवाई कर रही और नहीं परिवहन विभाग।
वन निगम के नर्सरी को पाटा राख से
डिंगापुर के जिस वनभूमि में राख़ड डंप किया जा रहा है, उस क्षेत्र में कुछ वर्ष पहले वन विकास निगम ने पौधा रोपण किया था। राखड़ की वजह से पौधे नष्ट हो रहे हैं। नजदीक में ही ढेंगुरनाला है, जिसमें राख समाहित हो रहा। ढेंगुरनाला का पानी जीवनदायिनी हसदेव नदी में समाहित हो रहा है।इस वजह से हसदेव के प्रदूषित होने का खतरा मंडरा रहा। आलम यह है कि जिले कि जिस भी क्षेत्र में चले जाइए, हर एक- दो किलोमीटर में राख का ढेर नजर आ जाएगा।
पीएमजीएसवाई सड़कों में भी दौड़ रहे भारी वाहन
राखड़ लोड गाडियां न केवल मुख्य मार्ग में बल्कि प्रतिबंधित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) की सड़कों पर दौड़ रही। मड़वारानी से ग्राम कराईनारा तक पहुंच मार्ग पीएमजीएसवाई की है, पर इसका भी उपयोग धडल्ले से किया जा रहा। गंभीर बात यह है कि कई पीएमजीएसवाई सड़कों पर भी प्रशासन ने भारी वाहन चलने की अनुमति इन दिनों प्रदान कर दी है। इसकी वजह से सड़क दुर्घटनाओं की भी आशंका बनी रहती है। मंगलवार को ही रिस्दी के पास एक राखड़ से भरी वाहन की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई।
सोन नदी के पास यदि राख डंप किया जा रहा है, तो हम इसका परीक्षण कराएंगे। यदि राख परिवहन में नियमों का उल्लंघन किया गया है, तो कार्रवाई की जाएगी।
-शैलेष पिस्दा पर्यावरण , संरक्षण मंडल अधिकारी
राखड़ परिवहन में लगी ट्रांसपोर्ट कंपनियों को नियमों का पालन करने कहा गया है। किसी भी तरह के उल्लंघन पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदीप कुमार साहू, अपर कलेक्टर कोरबा