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कोरबा: कोर्ट में मुकर गई थी पीड़िता, DNA रिपोर्ट ने खोला सामूहिक दुष्कर्म का राज, दोनों दोषियों को 20-20 साल सजा

कोरबा जिले के लेमरू थाना क्षेत्र में विधवा महिला से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो दोषियों हसरुहन मंझवार और अजय सिंह उरांव ...और पढ़ें

By Pradeep BarmaiyaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 09:08:51 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 09:08:51 PM (IST)
कोरबा: कोर्ट में मुकर गई थी पीड़िता, DNA रिपोर्ट ने खोला सामूहिक दुष्कर्म का राज, दोनों दोषियों को 20-20 साल सजा
अजय सिंह, फाइल फोटो

HighLights

  1. लेमरू सामूहिक दुष्कर्म के दोनों दोषियों को 20-20 साल की कठोर सजा।
  2. धमकी के डर से अदालत में मुकर गई थी पीड़िता, दोबारा बयान में बताई सच्चाई
  3. फास्ट ट्रैक कोर्ट कोरबा की न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा का फैसला।

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: सामूहिक दुष्कर्म मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों आरोपितों को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट कोरबा की अपर सत्र न्यायाधीश सीमा प्रताप चंद्रा ने यह फैसला वैज्ञानिक साक्ष्यों और अभियोजन की ओर से प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर सुनाया।

शासन की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक मोहन सोनी ने बताया कि घटना लेमरू थाना क्षेत्र की है। यहां निवासरत हसरुहन मंझवार और अजय सिंह, 19 जुलाई 2025 को शराब के नशे में गांव में ही निवासरत एक बेवा महिला के घर का दरवाजा तोड़ कर जबरन अंदर घुस गए। इसके बाद गला दबा कर डराते हुए सामूहिक रुप से दुष्कर्म किया।


घटना के बाद उसे जान से मारने की धमकी देकर दोनों फरार हो गए। दूसरे दिन सुबह बेवा ने घटना की जानकारी अपने देवर- देवरानी को दी। तदुरांत पुलिस में मामला दर्ज कराया। शिकायत पर लेमरू पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 70(1), 332 (ब) और 351(3) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया और जांच उपरांत दोनों को गिरफ्तार कर मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया।

मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में अपने पूर्व बयान से अलग रुख अपनाते हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना से इनकार कर दिया। अभियोजन के सामने चुनौती खड़ी होने के बावजूद जांच में जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य मामले की अहम कड़ी बने रहे।

फोरेंसिक जांच की डीएनए रिपोर्ट में मिले साक्ष्यों ने आरोपियों को घटना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत ने पीड़िता को दोबारा बयान के लिए तलब किया। कड़ी सुरक्षा के बीच पीड़िता ने अदालत को बताया कि आरोपियों की धमकी और डर के कारण उसने पहले सच नहीं बताया था।

इसके बाद अभियोजन पक्ष ने डीएनए रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। अतिरिक्त लोक अभियोजक सोनी ने डीएनए रिपोर्ट समेत अन्य तथ्यों और दलीलों को न्यायालय के समक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने हस्रुहन मंझवार और अजय सिंह उरांव को दोषी ठहराते हुए दोनों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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