नईदुनिया प्रतिनिधि,कोरबा: हसदेव नदी में आई बाढ़ और लगातार बने हुए मानसूनी हालात के कारण शहर की महत्वाकांक्षी सीवरेज ट्रीटमेंट परियोजना के तहत नदी के ऊपर से पाइप लाइन बिछाने काम ठप हो गया है। लगभग 88.50 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति नगर क्षेत्र में निर्माणाधीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का करीब 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन नदी में बढ़े जलस्तर के कारण निर्माण गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
वहीं, 211 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) के निर्माण में भी देरी की आशंका बनी हुई है। परियोजना के तहत शहर से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 80 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जाएगा। इससे हसदेव नदी में बिना उपचारित सीवरेज जल के प्रवाह पर रोक लगेगी और उपचारित जल का उपयोग औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार एसटीपी निर्माण और सीवरेज नेटवर्क को पूरी तरह जोड़ने में लगभग एक वर्ष का समय लगेगा। इसके बाद शुद्ध पानी को नदी में छोड़ा जा सकेगा। वहीं, टीटीपी के निर्माण और संचालन के बाद जल को औद्योगिक उपयोग के लिए और अधिक शुद्ध किया जाएगा।
पूरी परियोजना का प्रभाव धरातल पर दिखने में करीब दो वर्ष लग सकते हैं। वर्तमान में शहर के विभिन्न नालों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में गंदा पानी सीधे हसदेव नदी में पहुंच रहा है, जिससे नदी की जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। एसटीपी शुरू होने के बाद प्राथमिक, द्वितीयक और जैविक शोधन प्रक्रियाओं के माध्यम से पानी में मौजूद ठोस अपशिष्ट, कार्बनिक पदार्थ और प्रदूषकों को हटाया जाएगा।
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क्या है टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट
टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) सीवरेज शोधन की उन्नत तकनीक पर आधारित प्रणाली है। इसमें एसटीपी से निकलने वाले उपचारित पानी को अतिरिक्त फिल्ट्रेशन, रासायनिक उपचार और कीटाणुशोधन प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। इस प्रक्रिया के बाद पानी औद्योगिक उपयोग, कूलिंग सिस्टम तथा अन्य गैर-पेय कार्यों के लिए उपयुक्त बन जाता है। कोरबा में प्रस्तावित टीटीपी का मुख्य उद्देश्य उपचारित जल को एनटीपीसी एवं अन्य ताप विद्युत संयंत्रों को उपलब्ध कराना है, जिससे उद्योगों की जल आवश्यकता पूरी की जा सके।
बांगो जलाशय के पानी की होगी बचत
परियोजना पूरी होने के बाद लगभग 38 एमएलडी उपचारित सीवरेज जल का उपयोग उद्योगों में किया जाएगा। इससे ताप विद्युत संयंत्रों की बांगो जलाशय पर निर्भरता कम होगी और अधिक मात्रा में ताजा पानी सिंचाई एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए उपलब्ध हो सकेगा। इससे किसानों को खरीफ के साथ-साथ ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए भी बेहतर जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
कृषि, मत्स्य पालन और पर्यटन को मिलेगा लाभ
जल संरक्षण बढ़ने से कृषि क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने से खेती का रकबा बढ़ सकेगा। वहीं, जलाशय में पर्याप्त जल स्तर बनाए रखने से मत्स्य पालन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
गर्मी के मौसम में जलस्तर कम होने से मत्स्य उत्पादन और पर्यटन गतिविधियां प्रभावित होती हैं। जल उपलब्धता बेहतर होने पर बांगो जलाशय क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की उम्मीद
कोरबा लंबे समय से सीवरेज और जल प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। परियोजना के पूरा होने के बाद जलभराव, दुर्गंध और प्रदूषण जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और शहर की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी। आधुनिक सीवरेज प्रबंधन व्यवस्था विकसित होने से स्वच्छ सर्वेक्षण में कोरबा की रैंकिंग में भी सुधार हो सकता है। साथ ही यह परियोजना जल पुनर्चक्रण और सतत जल प्रबंधन की दिशा में जिले के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
फैक्ट फाइल
88.50- करोड़ रुपये एसटीपी निर्माण लागत 211- करोड़ रुपये टीटीपी प्रस्तावित लागत 80- एमएलडी प्रतिदिन शोधन क्षमता 38- एमएलडी औद्योगिक उपयोग हेतु उपचारित जल 50- प्रतिशत पूर्ण एसटीपी कार्य प्रगति लगातार हो रही वर्षा की वजह से पाइपलाइन बिछाने के लिए नदी में कालम बनाने का काम बंद हो गया है। ट्रीटमेंट प्लांट के आधार संरचना में काम जारी है। टीटीपी के निविदा की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। मानसून के बाद इसका भी काम चालू हो जाएगा। राकेश मसीह, कार्यपालन अभियंंता, नगर निगम