
कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश के 26 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से 23, 000 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा। प्रतिदिन एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन में 17,000 टन कोयले की खपत होती और चार करोड़ टन कोयला संयंत्रों में जल रहा। प्रतिदिन एक करोड़ 76 लाख टन राख निकलता है। अकेले
कोरबा से प्रतिदिन करीब दो लाख टन राख उत्सर्जित होता है।
औसतन 55 प्रतिशत राख की खपत संयंत्र प्रबंधन कर पा रही। यही वजह है कि राख भंडारण के लिए स्थल नहीं और ठेका परिवहन के माध्यम से यहां-वहां डंप किया जा रहा है। औद्योगिक नगरी कोरबा में एक दर्जन से भी अधिक बिजली संयंत्र संचालित हैं। सभी संयंत्रों के पास दो से तीन राखड़ डैम की सुविधा है। एनजीटी ने शत-प्रतिशत राख की खपत के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद इसके पालन की ओर विद्युत संयंत्र प्रबंधन गंभीर नहीं हैं। इसका खामियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा। ज्यादातर संयंत्र के डैम से राख निकालकर लो-लाइन एरिया के नाम पर सड़क किनारे व किसानों के खेतों में फेंका जा रहा। इसका असर नदी, नालों समेत तमाम प्राकृतिक जल स्त्रोत पर पड़ रहा।
राखड़ के परिवहन में लगे कंपनियों को मानो पर्यावरण संरक्षण से खिलवाड़ की खुली छूट दे दी गई हो। प्रशासन के अधिकारी भी आंख मूंद कर राख डंप करने की अनुमति प्रदान कर रहे हैं। इससे पहले कभी भी इस तरह पर्यावरण से समझौता कर राख डंप करने की अनुमति नहीं दी गई। संयंत्र प्रबंधन के सामने जमीन की संकट बनी हुई है। इस वजह से नया राखड़ डैम तैयार नहीं हो पा रहा। एक राखड़ डैम के लिए 150 से 200 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता पड़ती है।
सरकार ने राखड़ डैम के लिए भूमि आवंटित करना बंद कर दिया है। जब तक राख की खपत सुनिश्चत नहीं होगी, इस समस्या का हल नहीं निकलेगा।
जहां-जहां राखड़ फेंके गए
वहां जाएंगे राजस्व मंत्री
राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा है कि राखड़ की समस्या तो है और हमने इससे मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया है। उन्होने भी संज्ञान लेते हुए कहा था कि इस पर अंकुश लगाया जाएगा। मुख्य सचिव को भी इससे अवगत कराया गया है। मैं खुद जल्द उन स्थानों का दौरा करूंगा, जहां राख डंप किया जा रहा। जिसकी वजह से लोगों को प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा।
सांसद ने स्वीकारा, प्रदूषण रोकने हम कड़ा कदम नहीं उठा सके
सांसद ज्योत्सना महंत ने भी रिहायशी इलाकों में राखड़ फेंके जाने की समस्या को गंभीर बताया है। उन्होने कहा कि इस समस्या को उन्होने केंद्र में उठाया है। इससे लोगों के स्वास्थ पर असर पर पड़ रहा। साथ ही दुर्घटनाएं भी हो रही। अब चूंकि केंद्र सरकार इस पर ठोस कदम नहीं उठा रही। इसलिए अब हम अपने ही राज्य सरकार को अवगत कराएंगे। उन्होने यह स्वीकार किया कि प्रदूषण रोकने के क्षेत्र में हमने कोई बड़ा कदम अब तक नहीं उठा पाए।