
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: रात में हाथियों के गांव की ओर आ धमकने का डर ऐसा कि तेलियामार के किसान खेलन सिंह को खपरैल के छप्पर पर खाट चढ़ाकर सोना पड़ा। कहीं कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए तो कहीं खेतों में खड़ी धान की फसल रौंद दी गई। पसान क्षेत्र में 52 हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। बीते एक सप्ताह में हाथियों का दल आधा दर्जन ग्रामीणों के कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा चुका है और 30 एकड़ से अधिक क्षेत्र में लगी धान की फसल नष्ट कर दी है।
हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों के सामने दोहरी मार की स्थिति है। कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने से सिर छिपाने का ठिकाना खतरे में है, वहीं खेतों में खड़ी धान की फसल बर्बाद होने से महीनों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। किसानों के लिए यह नुकसान केवल खेत तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका से भी जुड़ा है। रात में हाथियों के गांव की ओर आने की आशंका के बीच ग्रामीणों को घर और खेत, दोनों की चिंता सताती है। छप्पर पर खाट चढ़ाकर सोने की मजबूरी इसी भयावह स्थिति की तस्वीर पेश करती है। हाथियों के करीब आने पर कमजोर मकानों में रहना जोखिम भरा महसूस हो रहा है। ग्रामीणों की चिंता अब केवल फसल बचाने तक सीमित नहीं, बल्कि अपने परिवार और घर को सुरक्षित रखने की भी है।
हास्टल से घर लौटे 160 बच्चे
गांव के ही दीपक मिशन स्कूल हास्टल की बाउंड्री तोड़कर हाथी परिसर में घुस गए, जिसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर 160 बच्चों को वापस घर भेजना पड़ा। इस घटना ने दिखाया कि हाथियों की आवाजाही का असर खेतों और ग्रामीण मकानों के साथ शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच गया है।
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मरवाही के जंगलों की ओर बढ़ा हाथियों का दल
कटघोरा वनमंडल के डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि हाथियों का दल अब पसान क्षेत्र से निकलकर पड़ोसी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वन क्षेत्र के जंगलों की ओर चला गया है। हाथियों की आवाजाही के कारण सीमावर्ती गांवों में सतर्कता जरूरी है। ग्रामीणों को हाथियों के करीब जाने, उन्हें घेरने या शोर मचाकर भगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में वन विभाग को तत्काल सूचना देना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है।