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गरीबी को पछाड़ एशियन गेम्स की स्टार बनीं कोरबा की बेटी, जापान में संजू देवी के तूफानी प्रदर्शन से बांग्लादेश पस्त

जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में कोरबा जिले के केराकछार गांव की संजू देवी ने शानदार प्रदर्शन किया है। बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में उनकी तूफानी...और पढ़ें

By Pradeep BarmaiyaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 06:31:12 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 06:31:12 PM (IST)
गरीबी को पछाड़ एशियन गेम्स की स्टार बनीं कोरबा की बेटी, जापान में संजू देवी के तूफानी प्रदर्शन से बांग्लादेश पस्त
प्रतियोगिता में खिलाड़ियो को छूकर वापस भागती नीले सूट में संजू, नईदुनिया

HighLights

  1. कोरबा के केराकछार गांव के एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं संजू।
  2. एशियन गेम्स में बांग्लादेश के खिलाफ संजू देवी ने लगाई तूफानी रेड।
  3. भारत ने 42-21 से मुकाबला जीतकर एशियाई मैदान पर लहराया परचम।

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा। जापान के टोकाई में भारत का परचम लहरा रहा है और इस स्वर्णिम गाथा की नायिका बनी हैं कोरबा के पाली केराकछार की संजू देवी। एशियन गेम्स 2026 की कबड्डी स्पर्धा में जब संजू देवी ने मैट पर उतरकर बांग्लादेश के खिलाफ तूफानी रेड लगाई, तो विरोधी टीम का डिफेंस ताश के पत्तों की तरह ढह गया। 42-21 की इस एकतरफा जीत में संजू की आक्रामक रणनीति और सटीक टैकल ने देश को जीत की राह दिखाई।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकती इस सफलता के पीछे संघर्ष, आंसुओं और कड़े इम्तिहानों की एक लंबी दास्तान छिपी है। विकासखंड पाली अंतर्गत वनांचल गांव केराकछार में पली-बढ़ीं 23 वर्षीया संजू देवी का बचपन बेहद अभावों में बीता। एक बेहद गरीब परिवार में जन्मीं संजू के पिता रामजी यादव रोजी मजदूरी का कार्य करते हैं और मां अमरिका बाई गृहिणी हैं। घर में दो वक्त की रोटी और खेल का सामान जुटाना भी किसी चुनौती से कम नहीं था।


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गाँव के कच्चे रास्तों पर नंगे पैर दौड़ते हुए संजू ने पहली बार कबड्डी का हाथ पकड़ा था। न सही जूते थे, न स्पोर्ट्स किट और न ही डाइट का कोई ठिकाना, लेकिन सीने में कुछ कर गुजरने की आग थी और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने तीन कठिन राष्ट्रीय कैंपों को पार किया और भारतीय महिला कबड्डी टीम में जगह बनाई। इससे पहले कबड्डी विश्वकप में भारत को विजेता बनाने और 16 महत्वपूर्ण अंक दिलाने वाली संजू को मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर के खिताब से भी नवाजा जा चुका है।

आज जब संजू देवी जापान के टोकाई सिटिजन जिमनेजियम में भारतीय तिरंगे की शान बढ़ा रही हैं, तो केराकछार के उस छोटे से कच्चे घर में उनके माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू थम नहीं रहे हैं। जिस बेटी के पास कभी खुद के जूते नहीं हुआ करते थे, आज वह पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ा रही है।

संजू देवी की यह सफलता केवल एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है, बल्कि यह हर उस ग्रामीण बेटी का हौसला है जो सीमित साधनों में भी आसमान छूने का दम रखती है।