कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। करंट से हाथियों की होने वाल मौत की घटनाओं पर रोक लगाने जंगल क्षेत्र विद्युत खंभों के तार को दुरूस्त कराने के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। हाथियों की झुंड से अलग घुम रहे एक लोनर हाथी की मौत 11 केवी करंट तार की चपेट में आने से हो गई है। केवल 15 फीट की ऊंचाई पर तार लटक रही थी, इस वजह से यह दुर्घटना हुई।
कटघोरा वन मंडल के पनगंवा में एक हाथी को मृत अवस्था में रविवार की सुबह पांच बजे ग्रामीणों ने देखा। बताया जा रहा कि इस क्षेत्र में पिछले चार दिन से 60 हाथी विचरण कर रहे थे। इनमें झुंड से अलग घूम रहा यह हाथी 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आ गया। वन मंडलाधिकारी कुमार निशांत ने बताया कि यह घटना रात करीब दो बजे की है। दो खंभों के बीच में टापू होने की वजह तार की ऊंचाई जमीन से बहुत कम है। इस मार्ग से गुरते समय हाथी करंट के संपर्क आ गया जिससे घटना स्थल पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे वन मंडला अधिकारी व परिक्षेत्र के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में पशु चिकित्सा विभाग के चिकित्सकाें ने पोस्टमार्टम किया। इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के बाद घटना स्थल पर हाथी के शव को दफना दिया गया। वन वित्त निगम बिलासपुर के अधिकारी ने पिछले सितंबर माह में एक आदेश जारी कर हाथी प्रभावित क्षेत्र के जितने भी तार नीचे लटके हुए हैं उसे दुरूस्त कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए प्रशिक्षक भी भेजा गया है था। स्थानीय अधिकारियों ने करंट से हाथियों की मौत न इसके लिए मुकम्मल दावा भी किया था। हाथियों की सुरक्षा को लेकर अधिकारी कितने सजग हैं इस घटना से समझा जा सकता है।
माह भर पहले विद्युत विभाग को लिखा गया था पत्र
पसान व मोरगा सब स्टेशन से जंगल में बसे छोटे-छोटे गांवों में बिजली आपूर्ति की गई है। 11 केवी हाई वोल्ट करंट जंगल मार्ग से होकर गुजरी है। हाथी विचरण को देखते हुए वन विभाग नेे माह भर पहले ही विद्युत वितरण विभाग को पत्र लिखा था। इसके बाद भी वितरण विभाग ने लटकते तार में सुधार नहीं किया और अंतत: एक हाथी की जान चली गई है।
पांच माह में चार हाथी की मौत
हाथियों की दर्दनाक मौत का सिलसिला थमने नाम नहीं ले रहा। अगस्त में कोरबा वन परिक्षेत्र के गुरमा जंगल में एक नन्हे हाथी की मौत दलदल में फंसने से हो गई थी। दूसरी घटना सितंबर माह में केंदई वन परिक्षेत्र में हुई। जहां एक नन्हे हाथी की मौत हसदेव नदी पार करते समय हो गई। एक अन्य नन्हे हाथी की मौत झुंड में हाथियो के पैरों तले कुचले जाने से हुई। अब चौथी मौत की घटना करंट के कारण हुई है।
लगातार हाथियों की बढ़ती जा रही संख्या
साल भर पहले कोरबा वन मंडल में हाथियों की संख्या पसान व केंदई रेंज में 42 थी जो बढ़ कर 61 हो गई। उधर कोरबा वन मंडल गुरमा जंगल में 27 हाथी विचरण कर रहे हैं। जिस तदाद में हाथियों की संख्या बढ़ रही उसकी तुलना में सुरक्षा के उपाय नगण्य है। प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीण असुरक्षित जीने पर मजबूर हैं। जन हानि के साथ फसल हानि भी लगातार बढ़ रही है।