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कोरबा में अंशिका और अरुणा बनीं नई पीढ़ी की प्रेरणा, तकनीकी दक्षता से बालको में तोड़ी पुरुषों के वर्चस्व की धारणा

बालको कोरबा में महिला इंजीनियरों अंशिका सिंह और अरुणा ने उत्पादन, प्रचालन और सुरक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाया है। अंशिका ने कास्ट हाउस में अपनी कार्यशैली और प्रोत्साहन पहल से विशेष पहचान बनाई।

By Pradeep BarmaiyaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 16 Aug 2026 09:29:53 AM (IST)Updated Date: Sun, 16 Aug 2026 09:29:53 AM (IST)
कोरबा में अंशिका और अरुणा बनीं नई पीढ़ी की प्रेरणा, तकनीकी दक्षता से बालको में तोड़ी पुरुषों के वर्चस्व की धारणा
कार्यस्थल पर उपस्थित महिला इंजीनियर

HighLights

  1. बालको के चुनौतीपूर्ण कास्ट हाउस में अंशिका सिंह ने जमाई धाक।
  2. पावर बैकअप को स्काडा से जोड़ अरुणा ने जीता 'सीईओ अवॉर्ड'।
  3. उत्पादन और सुरक्षा में महिलाओं ने तोड़ी पुरुषों के वर्चस्व की धारणा।

नईदुनिया न्यूज, कोरबा : कभी विनिर्माण उद्योग में तकनीकी और इंजीनियरिंग से जुड़ी जिम्मेदारियों को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, लेकिन बदलते दौर में महिला इंजीनियरों ने इस धारणा को पीछे छोड़ दिया है। बालको में महिला इंजीनियर उत्पादन, खनन, प्रचालन और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास के बल पर वे कंपनी की प्रगति में योगदान देने के साथ ही नई पीढ़ी की महिला इंजीनियरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। बालको में कार्यरत अंशिका सिंह ने इंदौर की आइपीएस एकेडमी से रासायनिक अभियांत्रिकी की पढ़ाई की। बालको से जुड़ने के बाद उन्होंने एल्यूमिनियम उद्योग के चुनौतीपूर्ण कास्ट हाउस में काम शुरू किया।


शाप फ्लोर पर शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी पहचान बनाई। अंशिका के अनुसार, शुरुआत में सहकर्मियों का भरोसा जीतना बड़ी चुनौती थी। वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग और नए विचारों पर काम करने के अवसर ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। अंशिका ने प्रबंधन के सहयोग से सम्मान एवं पुरस्कार पहल शुरू की। इसका उद्देश्य बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना था।

इससे टीम का उत्साह बढ़ा और बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद मिली। आज शाप फ्लोर पर अंशिका की पहचान महिला इंजीनियर के तौर पर नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और उपलब्धियों से होती है। उनका मानना है कि उनकी यात्रा आने वाली महिला इंजीनियरों के लिए नए अवसरों का रास्ता खोलेगी।

इसी तरह बालको में कार्यरत अरुणा ने एनआईटी सिक्किम से विद्युत एवं इलेक्ट्रानिक्स अभियांत्रिकी की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे संयंत्र में काम शुरू करने को लेकर उनके मन में शुरुआती झिझक थी, लेकिन सहकर्मियों के सहयोग और वरिष्ठ अधिकारियों के भरोसे ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। बीते चार वर्षों में उन्होंने जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता से निभाते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।

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बेहतर बनाने की जिम्मेदारी मिली

अरुणा की टीम को बालको में बिजली के बैकअप तंत्र को और बेहतर बनाने की जिम्मेदारी मिली। टीम ने पूरे तंत्र को स्काडा के माध्यम से केंद्रीकृत किया। इससे विभिन्न आंकड़ों की निगरानी और विश्लेषण कर संभावित समस्याओं की पहले पहचान करना संभव हुआ। समय रहते आवश्यक कदम उठाने से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिली।

महिला इंजीनियरों की ये उपलब्धियां

इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान के लिए अरुणा को संयंत्र के सर्वोच्च सम्मान सीईओ अवार्ड से सम्मानित किया गया। बालको की महिला इंजीनियरों की ये उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं हैं। वे विनिर्माण उद्योग में बदलते कार्य वातावरण की तस्वीर भी पेश करती हैं।

अवसर और अनुकूल कार्य वातावरण

तकनीकी दक्षता, नेतृत्व और आत्मविश्वास के साथ महिलाएं उन क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं, जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों से जोड़कर देखा जाता रहा है। अवसर और अनुकूल कार्य वातावरण मिलने पर महिलाएं एल्यूमिनियम उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी की महिला इंजीनियरों को नए सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित कर रही है।

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