2.40 लाख कोल कर्मियों का नया वेतन समझौता अटका, जेबीसीसीआई-12 के गठन के लिए नहीं बनी समिति
कोल इंडिया के करीब 2.40 लाख कर्मचारियों का नया वेतन समझौता समिति के गठन में देरी के कारण अटका हुआ है। पुराना समझौता 30 जून को खत्म हो चुका है और मंत्र...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 06:02:04 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 06:02:04 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता-11 समाप्त होने के बाद भी नए समझौते की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई।
- यूनियनों ने भरोसे के बाद रांची में होने वाला अपना संयुक्त सम्मेलन स्थगित कर दिया।
- कर्मचारी अब कोरे आश्वासनों के बजाय मंत्रालय और प्रबंधन के वास्तविक कदमों का इंतजार कर रहे।
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा : कोयला कर्मियों के नए वेतन समझौते की राह में अब सबसे बड़ी अड़चन वेतन वार्ता नहीं, बल्कि वार्ता के लिए समिति का गठन बन गया है। राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता-11 की अवधि 30 जून को समाप्त हो चुकी है और करीब 2.40 लाख गैर-कार्यकारी कर्मचारी नई वेतन वार्ता शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। 3 सितंबर को कोल इंडिया प्रबंधन ने ट्रेड यूनियनों को जेबीसीसीआई-12 के गठन के लिए कोयला मंत्रालय से अनुमति लेने का भरोसा दिया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में अगला कदम सामने नहीं आया है।
एपेक्स संयुक्त परामर्श समिति की तीन सितंबर को हुई बैठक में यूनियनों ने जेबीसीसीआई-12 के गठन का मुद्दा उठाया था। प्रबंधन ने मंत्रालय को पत्र भेजकर अनुमति लेने की बात कही थी। इस आश्वासन के बाद यूनियनों ने 12 सितंबर को रांची में प्रस्तावित संयुक्त सम्मेलन भी टाल दिया था। अब 17 दिन बाद भी समिति गठन की अधिसूचना नहीं आने से यूनियनों के सामने आगे की रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पुराना वेतन समझौता एक जुलाई 2021 से 30 जून 2026 तक प्रभावी था। जेबीसीसीआई-11 के माध्यम से इसकी वार्ता और प्रक्रिया पूरी हुई थी। अब इसकी अवधि समाप्त होने के बाद नया समझौता करने के लिए जेबीसीसीआई-12 का गठन जरूरी है। समिति गठित होने के बाद ही प्रतिनिधि संगठनों के साथ वेतन और सेवा शर्तों से संबंधित वार्ता आगे बढ़ सकेगी। गठन में देरी का सीधा असर नई वार्ता शुरू होने की समय-सीमा पर पड़ रहा है।
बैठक के बाद यूनियनों को उम्मीद थी कि कोल इंडिया प्रबंधन मंत्रालय से अनुमति की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराएगा। लेकिन 20 सितंबर तक न मंत्रालय की मंजूरी सामने आई और न जेबीसीसीआई-12 के गठन की अधिसूचना। ऐसे में अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि प्रबंधन का प्रस्ताव मंत्रालय तक पहुंचा या नहीं और अनुमति की प्रक्रिया किस स्तर पर है।
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श्रम संबंधों की व्यवस्था भी होगी महत्वपूर्ण
जेबीसीसीआई-12 का गठन केवल नए वेतन समझौते की शुरुआत तक सीमित नहीं रहेगा। औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के प्रावधानों के संभावित क्रियान्वयन तथा कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व और प्रबंधन के साथ वार्ता की व्यवस्था पर भी समिति में चर्चा होगी। इसलिए समिति का गठन कोयला उद्योग में आने वाले समय की श्रम संबंधी व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है ।
अब नजर आश्वासन पर नहीं, अमल पर
फिलहाल कर्मचारियों और यूनियनों की नजर कोल इंडिया प्रबंधन तथा कोयला मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर है। सबसे अहम सवाल यही है कि मंत्रालय से अनुमति कब मिलेगी, जेबीसीसीआई-12 का गठन कब होगा और नई वेतन वार्ता कब शुरू होगी। आश्वासन के बाद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से अब यूनियनों की नजर आश्वासन के बजाय उसके अमल पर टिक गई है।