कोरबा:वैज्ञानिक विधि से कचरा प्रबंधन से मिलेगी पर्यावरण को मजबूती; जून तक 25% पंचायतें होंगी कचरा मुक्त
कोरबा जिला पंचायत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के क्रियान्वयन के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। सीईओ दिनेश नाग ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 1 अप्रैल से लागू नए नियमों के तहत ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण शुल्क और दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाएंगे।
Publish Date: Thu, 28 May 2026 08:35:41 AM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 08:35:41 AM (IST)
बैठक में उपस्थित अधिकारी, नईदुनियाHighLights
- कचरा प्रबंधन के नए नियम 2026 देश भर में लागू
- जून तक कोरबा की 25 प्रतिशत पंचायतें होंगी गारबेज फ्री
- ग्रामीण क्षेत्रों में भी लगेगा कचरा कलेक्शन शुल्क
नईदुनिया न्यूज, कोरबा: भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि नए नियमों का उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण को रोकना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अधिकारी दिनेश नाग ने बताया कि 27 जनवरी को अधिसूचित ये नियम वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान ले चुके हैं तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार एक अप्रैल से देशभर के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लागू कर दिए गए हैं। सीईओ नाग ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
इसके तहत कचरा संग्रहण शुल्क, शिकायत निवारण प्रणाली तथा निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान भी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्राम एवं जनपद स्तर पर उत्पन्न कचरे की रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिवस में तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी। राज्य शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार जून माह तक जिले की 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक तरीके से कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यशाला में स्वच्छता अभियान में जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया गया। श्री नाग ने कहा कि स्वच्छता की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने घरों में वैज्ञानिक विधि से कचरा प्रबंधन अपनाने तथा कचरे के पृथक्करण के लिए नीले, हरे, लाल और पीले रंग के डस्टबिन का उपयोग करने की बात कही गई। इस दौरान स्वच्छ भारत मिशन के दीप सरकार ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के उद्देश्य, प्रमुख विशेषताओं एवं महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में लेखा अधिकारी राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी इंदिरा भगत, अमिता साहू, जनपद पंचायतों के सीईओ, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा मनरेगा के अधिकारी-कर्मचारी एवं तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।
खबर की मुख्य बाते
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लागू: वर्ष 2016 के पुराने कचरा नियमों को विलोपित कर केंद्र सरकार का नया सख्त कानून 1 अप्रैल से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में प्रभावी हो गया है।
- 15 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट: अब स्वच्छता को लेकर कागजी खानापूर्ति नहीं चलेगी, जनपद और ग्राम पंचायतों को पाक्षिक (15 दिवसीय) प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपनी होगी।
- चार रंगों का डस्टबिन फॉर्मूला: सूखे, गीले, खतरनाक और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के अलग-अलग निपटारे के लिए नीले, हरे, लाल और पीले रंग के डस्टबिन के उपयोग की अनिवार्यता बताई गई।
- अधिकारियों को अल्टीमेटम: जिला पंचायत सीईओ ने सभी जनपद प्रभारियों और तकनीकी सहायकों को जून माह तक तय 25% पंचायतों को क्लस्टर मॉडल पर आदर्श बनाने के निर्देश दिए।
यह भी पढ़ें- अवैध उत्खनन: लिम्हा में कोल डिपो सील, नौ वाहन समेत 1500 मीट्रिक टन कोयला जब्त