हाथों में डंडे लेकर कोरबा की सड़कों पर उतरीं महिलाएं, शराबखोरी के खिलाफ खोला जोरदार मोर्चा
कोरबा जिले के कोलगा गांव में महिलाओं ने शराबखोरी के खिलाफ एकजुट होकर हाथों में डंडे उठाकर शराबबंदी का सामूहिक संकल्प लिया। गांव में शराब बनाने, बेचने और पीने वालों को सीधे पुलिस को सौंपने का निर्णय लिया गया है।
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 05:06:21 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 05:14:37 PM (IST)
नशे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते कोलगा गांव की महिलाएंHighLights
- घर उजड़ने से बचाने कोलगा गांव की महिलाएं आईं आगे।
- सामाजिक बुराई के खिलाफ बदलाव की बनी मिसाल।
- सर्वसम्मति से गांव में शराब बिक्री और सेवन पर रोक लगाई गई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा : घर में शराब पीकर लौटने वाले व्यक्ति का इंतजार करती पत्नी, नशे में विवाद की आशंका से सहमे बच्चे और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझते परिवारों की पीड़ा आखिरकार कोलगा गांव की महिलाओं के सब्र का बांध तोड़ गई। वर्षों से चली आ रही शराबखोरी की समस्या के खिलाफ अब उन्होंने खुद मोर्चा संभाल लिया है।
करतला थाना क्षेत्र के इस गांव में महिलाओं ने शराबबंदी को केवल एक प्रस्ताव नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक जिम्मेदारी बनाने का संकल्प लिया है। उनका साफ कहना है कि अब शराब के कारण किसी घर की शांति नहीं बिगड़ने दी जाएगी।
गांव के सरपंच संतराम राठिया की पहल पर आयोजित सामूहिक बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से गांव की सीमा में शराब बनाने, बेचने और पीने पर रोक लगाने का निर्णय लिया। इस फैसले के बाद सैकड़ों महिलाएं हाथों में डंडे लेकर सड़कों पर उतरीं। उन्होंने नारे लगाकर शराबबंदी के समर्थन में अपनी एकजुटता दिखाई।
महिलाओं के तेवर में आक्रोश के साथ उन परिवारों का दर्द भी झलक रहा था, जो लंबे समय से नशे की वजह से परेशानियां झेल रहे हैं। शराबखोरी का असर सिर्फ शराब पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसकी कीमत कई बार पूरा परिवार चुकाता है। घर की कमाई नशे में खर्च होने से बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें प्रभावित होती हैं।
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महिलाओं को घरेलू विवाद और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। बच्चों के सामने होने वाले झगड़ों का असर उनके मन और व्यवहार पर भी पड़ता है। गांव की महिलाओं ने इसी पीड़ा को अपनी लड़ाई का आधार बनाया है। उनका मानना है कि शराबबंदी से केवल नशे पर रोक नहीं लगेगी, बल्कि घरों में शांति लौटने और बच्चों को बेहतर माहौल मिलने की उम्मीद भी बनेगी।
सामूहिक फैसले से दिया स्पष्ट संदेश बैठक में तय किया गया कि गांव में शराब बनाते, बेचते या पीते हुए कोई भी व्यक्ति मिला तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाएगा। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि इस फैसले को लागू करने में पूरा गांव एकजुट रहेगा। करतला थाना प्रभारी भी पहल की जानकारी मिलने पर गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की।
कोलगा की महिलाओं की यह पहल बताती है कि सामाजिक बुराई के खिलाफ बदलाव की शुरुआत समाज के भीतर से भी हो सकती है। जिन घरों की परेशानियां अब तक चारदीवारी के भीतर सिमटी थीं, उनकी आवाज अब पूरे गांव का संकल्प बन गई है। महिलाओं की इस एकजुटता से उम्मीद जगी है कि गांव में नशे की जगह बच्चों की मुस्कान, परिवारों में सुकून और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता मिल सकेगी।