धनपुर की मां दुर्गा मंदिर में आस्था के दीप जले
चैत्र नवरात्र महोत्सव के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पेंड्रा से उत्तर में सिवनी जाने के रास्ते में पेंड्रा से 14 किलोमीटर दूर मुख्य मार् ...और पढ़ें
By Yogeshwar SharmaEdited By: Yogeshwar Sharma
Publish Date: Wed, 10 Apr 2024 12:26:35 AM (IST)Updated Date: Wed, 10 Apr 2024 12:26:35 AM (IST)
HighLights
- देवी मंदिरों में ज्शेतिकलश प्रज्वलित
- चैत्र नवरात्र महोत्सव के पहले दिन ही उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
- नौ दिवसीय आराधना हुई शुरू
नईदुनिया न्यूज, पेंड्रा। चैत्र नवरात्र महोत्सव के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पेंड्रा से उत्तर में सिवनी जाने के रास्ते में पेंड्रा से 14 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग में पुरातात्विक पौराणिक गांव धनपुर स्थित है। मंदिर में प्रथम दिन घट स्थापना के साथ नौ दिवसीय आराधना शुरू हो गई।
ज्ञात हो धनपुर में जन श्रुति के अनुसार प्राचीन काल में पांडवों ने रतनपुर में रहने के बाद एक वर्ष का अज्ञातवास धनपुर के जंगलों में व्यतीत किया था। इस दौरान उन्होंने लगभग 350 तालाब भी बनाए इनमें से 200 की संख्या में तालाब अभी भी अस्तित्व में है जबकि बाकी तालाबों को किसानों ने खेत बना लिए। धनपुर में खुदाई के दौरान अनेक तरह की मूर्तियां एवं निर्माण के अवशेष मिले हैं। यह शिल्प अविभाजित बिलासपुर जिले में बिखरे जैन, कल्चुरी हैहयवंशी मूर्ति शिल्प के समकालीन है जो नवीं दसवीं शताब्दी के मालूम पड़ते हैं। धनपुर जैन धर्मावलंबियों के आश्रय का केंद्र होने से यहां यत्र-तत्र जैन मूर्तियों के अवशेष से मिलते रहे हैं। प्राचीन काल में धनपुर उत्तरा पथ को दक्षिणा पथ से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग रहा है। यह मार्ग अंडी, कुड़कई, झावर, बसंतपुर, सोनबचरवार, होकर केंदा मातिन वा लाफा जमीदारी से होता हुआ रतनपुर से जुड़ा हुआ था। यही मार्ग जांजगीर, शिवरीनारायण नारायण से होकर जगन्नाथपुरी से जुड़ा हुआ है। पुराने समय में मवेशी बाजारों के लिए जाने के लिए यह पशु मार्ग था इस मार्ग पर पड़ने वाले मार्ग में नायक जाति के लोग मिलेंगे जो प्राचीन काल में उत्तर से दक्षिण भारत के मध्य संपर्क सूत्र के रूप में बंजारे का भी कार्य करते थे। प्राचीन काल में यहां पहाड़ी में स्थित पांडव गुफा में से एक गुप्त मार्ग सोहागपुर को जाता था जिससे धनपुर गुप्त मार्ग के द्वारा सोहागपुर एवं रतनपुर से जुड़ा हुआ था।धनपुर में बेनीबाई ,शहर खेरवा, भस्मासुर नामक स्थल है। यहां पहाड़ी के नीचे आदिशक्ति मां दुर्गा देवी की प्राचीन मंदिर है।20 वर्ष पूर्व एक तपस्वी युवा संत बाबा मनु गिरी आए तथा वही देवी मंदिर के ऊपर पहाड़ी में स्थित गुफा में तप करने लगे । गांव वालों के संपर्क करने पर तपस्वी संत ने धनपुर के देवी स्थान की महत्वता को देखते हुए यहां दुर्गा देवी की मंदिर का निर्माण का प्रकल्प प्रस्तावित किया। इसे लोगों ने स्वीकार करते हुए सार्वजनिक सहयोग से श्री आदिशक्ति मां दुर्गा देवी के मंदिर का निर्माण करना शुरू कर दिया । चार हजार वर्ग फीट में बन रहे नवनिर्मित दुर्गा मंदिर के तीन गर्भगृह है। इनके तीनों गुंबज का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा मंदिर के सुंदरीकरण का कार्य बाकी है। वर्तमान में आदिशक्ति मां दुर्गा देवी मंदिर पब्लिक ट्रस्ट धनपुर में श्रद्धालुओं द्वारा आस्था के दीप प्रज्वलित कराए गए हैं। इसमें 211 जवारा कलश तथा 181 मनोकामना ज्योति कलश का प्रज्वलित किए गए हैं।
कलेक्टर निरीक्षण के लिए पहुंची
कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने धनपुर स्थित दुर्गा देवी मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने नवरात्र महोत्सव की तैयारी की जानकारी ली तथा ट्रस्ट के पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दी। कलेक्टर ने मंदिर परिसर का निरीक्षण भी की। इस मौके पर ट्रस्ट के पदाधिकारी उपस्थित थे।