काशी से 419 किमी पैदल चलकर मैनपाट के चोरकीपानी धाम पहुंचे कांवड़िए, किया जलाभिषेक
सावन के पवित्र महीने में आस्था की अनूठी मिसाल पेश करते हुए 'महायात्रा 360' के कांवड़ियों ने अपनी पांचवें वर्ष की पदयात्रा पूरी कर ली है। वाराणसी के अस्सी घाट से पवित्र गंगाजल लेकर 12 दिनों में 419 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय कर कांवड़ियों का जत्था छत्तीसगढ़ के मैनपाट स्थित प्रसिद्ध चोरकीपानी धाम पहुंचा।
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 08:57:02 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 08:57:02 PM (IST)
पूजा-अर्चना करते विधायक रामकुमार टोप्पो के साथ श्रद्धालुजनHighLights
- सावन के अंतिम सोमवार पर मैनपाट में गूंजा हर-हर महादेव।
- महायात्रा 360 के कांवड़ियों ने पूरी की कठिन पदयात्रा।
- मैनपाट में किया स्वयंभू शिवलिंग का अभिषेक।
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : सावन के पवित्र महीने में आस्था की अनूठी मिसाल पेश करते हुए महायात्रा 360 के कांवड़ियों ने अपनी पांचवें वर्ष की पदयात्रा पूरी कर ली। वाराणसी के अस्सी घाट से पवित्र गंगाजल लेकर 12 दिन में 419 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर कांवड़ियों का जत्था सोमवार को छत्तीसगढ़ के मैनपाट स्थित प्रसिद्ध चोरकीपानी धाम पहुंचा।
यहां स्वयंभू शिवलिंग शंभू भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक कर कांवड़ियों ने अपने संकल्प को पूरा किया। जलाभिषेक के दौरान पूरा धाम हर-हर महादेव और बोल-बम के जयघोष से गूंज उठा।महायात्रा 360 की शुरुआत 13 अगस्त को वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ की पूजा और अस्सी घाट से गंगाजल उठाकर हुई थी।
सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के नेतृत्व में इस बार करीब 150 कांवड़िए इस यात्रा में शामिल हुए। विधायक टोप्पो खुद कांवड़ लेकर पैदल चले। यात्रा उत्तर प्रदेश से होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा प्रवेश किया। अंबिकापुर में रात्रि विश्राम के बाद मैनपाट के चोरकीपानी धाम पहुंची।रास्ते भर क्षेत्रवासियों ने कांवड़ियों का स्वागत किया।
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सावन के अंतिम सोमवार को धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। इस पावन अवसर पर विधायक रामकुमार टोप्पो ने अपनी धर्मपत्नी एवं बच्चों के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर विधि-विधान से रुद्राभिषेक पूजा की और सीतापुर विधानसभा क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
यात्रा मार्ग में उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जगह-जगह स्थानीय लोगों और शिवभक्तों ने कांवड़ियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और विश्राम की व्यवस्था की।चोरकीपानी धाम समिति द्वारा जलाभिषेक के बाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।