
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायगढ़: छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (सीजी सेट) देने पहुंचे अभ्यर्थियों के लिए रविवार को परीक्षा से पहले का समय उस वक्त विवाद में बदल गया, जब केंद्रों पर जांच के दौरान हाथ में बंधे कलावे को लेकर आपत्ति जताई गई। कलावा हटाने और कुछ मामलों में उसे काटने को लेकर अभ्यर्थियों और चांदमारी परीक्षा केंद्र प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति बन गई।
एक छात्रा को कलावा नहीं हटाने पर परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं देने के आरोप के बाद मामला और गरमा गया। देखते ही देखते बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार, सीजी सेट की दोनों पालियों की परीक्षा के लिए अभ्यर्थी निर्धारित केंद्रों पर पहुंचे थे। परीक्षा शुरू होने से पहले चांदमारी केंद्र में प्रवेश द्वार पर जांच के दौरान हाथ में कलावा बांधे अभ्यर्थियों से उसे हटाने के लिए कहा गया। कुछ अभ्यर्थियों ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा बताते हुए उतारने से इनकार कर दिया। इसी दौरान एक छात्रा द्वारा कलावा नहीं हटाने की बात पर उसे केंद्र में प्रवेश नहीं देने का आरोप सामने आया। इससे वहां मौजूद अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और एबीवीपी के कार्यकर्ता संबंधित परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए। सेंट जेवियर स्कूल सहित कुछ अन्य केंद्रों के बाहर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और परीक्षा प्रबंधन के रवैये पर आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने की सूचना पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों और संबंधित लोगों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया गया। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था भी संभाली गई। हालांकि, कलावा हटाने को लेकर उठा विवाद परीक्षा व्यवस्था और धार्मिक आस्था के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर गया।
विरोध कर रहे संगठनों और अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा में नकल रोकने के लिए मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य प्रतिबंधित सामग्री ले जाने पर रोक समझ में आती है, लेकिन कलावा हटाने या काटने के संबंध में स्पष्ट लिखित निर्देश क्या हैं, यह केंद्र पर बताया नहीं गया। उनका आरोप था कि धार्मिक आस्था से जुड़े धागे को जबरन काटने के बजाय वैकल्पिक तरीके से जांच की जा सकती थी।
उनका कहना था कि परीक्षा व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किसी अभ्यर्थी की धार्मिक भावना आहत नहीं होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच कर संबंधित केंद्र प्रभारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करने तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की।
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