
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। बीमार बड़े भाई के लीवर ट्रांसप्लांट के लिए जुटाई गई 30 लाख रुपये की रकम ठगी का शिकार हो गई। ठगों ने हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में डॉक्टरों से जान-पहचान होने और कम खर्च में लीवर ट्रांसप्लांट कराने में मदद का झांसा देकर कारोबारी से रुपये ऐंठ लिए। रकम लेने के बाद आरोपितों ने रुपये अस्पताल में जमा कराने की पर्ची देने का भरोसा दिया, लेकिन शाम तक दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। पीड़ित की शिकायत पर आजाद चौक थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, महासमुंद जिले के बसना निवासी सतीश कुमार अग्रवाल फर्नीचर का कारोबार करते हैं। उनके बड़े भाई रमेश कुमार अग्रवाल का हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने उन्हें लीवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी थी। अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए करीब 40 से 45 लाख रुपये खर्च आने की जानकारी दी थी। परिवार ने इलाज के लिए रकम जुटानी शुरू कर दी थी। अस्पताल में 50 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट भी जमा कराया जा चुका था।
शिकायत के मुताबिक, 30 सितंबर से पहले संजय नाम के व्यक्ति ने सतीश अग्रवाल से संपर्क कर लीवर ट्रांसप्लांट में मदद करने की बात कही थी। उसने दावा किया कि यशोदा अस्पताल में उसके परिचित डॉक्टर हैं और वह 30 लाख रुपये में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू करा सकता है। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि अस्पताल में रकम जमा कराने के साथ हैदराबाद पहुंचने पर भी पूरी मदद करेगा।
भाई की गंभीर बीमारी और इलाज की जरूरत के चलते सतीश अग्रवाल उसकी बातों में आ गए। संजय ने कहा कि वह अनिल नाम के व्यक्ति को रकम लेने भेजेगा। इसके बाद अनिल ने फोन कर बताया कि वह संजय के कहने पर रुपये लेने आएगा।
30 सितंबर की रात अनिल ने सतीश अग्रवाल के भांजे यश अग्रवाल से संपर्क किया। यश ने उसे अगले दिन रायपुर की समता कॉलोनी में एक्सिस जूस के सामने आने के लिए कहा। एक अक्टूबर को दोपहर करीब 1:10 बजे अनिल वहां पहुंचा और लीवर ट्रांसप्लांट के लिए जुटाए गए 30 लाख रुपये नकद ले गया। अनिल ने भरोसा दिया कि वह शाम तक अस्पताल में रकम जमा करने की पर्ची दे देगा। परिवार को उम्मीद थी कि भाई के इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी, लेकिन शाम होने पर जब उससे संपर्क करने की कोशिश की गई तो उसका मोबाइल बंद मिला। संजय का फोन भी बंद हो गया। इसके बाद परिवार को ठगी का संदेह हुआ।
परिवार के लिए यह रकम जुटाना आसान नहीं था। बड़े भाई के लीवर ट्रांसप्लांट के लिए 40 से 45 लाख रुपये के खर्च की जानकारी मिलने के बाद परिजन लगातार पैसों की व्यवस्था कर रहे थे। इसी बीच अस्पताल में जान-पहचान और कम खर्च में इलाज कराने का भरोसा देकर उनसे संपर्क किया गया। अब परिवार को इलाज की चिंता के साथ 30 लाख रुपये गंवाने का भी सामना करना पड़ रहा है। सतीश अग्रवाल की लिखित शिकायत पर आजाद चौक थाना पुलिस ने संजय और अनिल नाम से संपर्क करने वाले दो व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस मोबाइल नंबरों और आरोपितों की पहचान के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
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