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छत्तीसगढ़ में खत्म होगा 71 साल का इंतजार... रायपुर से बस्तर के रावघाट तक जल्द दौड़ेगी ट्रेन, रेलवे द्वारा टाइम-टेबल जारी

प्रदेश के बस्तर संभाग में अब तक रेलगाड़ी केवल कांकेर जिले के ताड़ोकी तक ही दौड़ रही थी, लेकिन अब जल्द ही इससे 17 किलोमीटर आगे रावघाट तक ट्रेन का संचाल...और पढ़ें

By Goswami SahuEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 10:41:28 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 10:41:28 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में खत्म होगा 71 साल का इंतजार... रायपुर से बस्तर के रावघाट तक जल्द दौड़ेगी ट्रेन, रेलवे द्वारा टाइम-टेबल जारी
रायपुर से रावघाट मेमू ट्रेन को हरी झंडी का इंतजार। (AI Generated Image)

HighLights

  1. बस्तर के वनांचल में बदलेगी रेल कनेक्टिविटी की तस्वीर
  2. रायपुर से रावघाट मेमू ट्रेन को हरी झंडी का इंतजार
  3. मेमू ट्रेन चलने से वनांचल के विकास को लगेंगे पंख

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। प्रदेश के बस्तर संभाग में अब तक रेलगाड़ी केवल कांकेर जिले के ताड़ोकी तक ही दौड़ रही थी, लेकिन अब जल्द ही इससे 17 किलोमीटर आगे रावघाट तक ट्रेन का संचालन शुरू होने जा रहा है। दल्लीराजहरा से रावघाट के लिए वर्ष 2011 में शुरू हुआ रेल लाइन का काम अब पूरा हो चुका है। इसके साथ ही जगदलपुर तक ट्रेन पहुंचने में अब केवल 140 किलोमीटर का हिस्सा शेष रह गया है।

रावघाट से जगदलपुर के बीच रेल लाइन निर्माण के लिए भी प्रक्रिया तेजी से शुरू हो चुकी है। यह रेल लाइन भिलाई स्टील प्लांट के लिए लौह अयस्क की आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। विदित हो कि रायपुर से जगदलपुर की कुल दूरी लगभग 300 किलोमीटर है। इस बहुप्रतीक्षित रेल सेवा के शुरू होने से स्थानीय कृषि उपज, वनोपज और व्यापार को एक बड़ा बढ़ावा मिलेगा।


रेलवे बोर्ड द्वारा टाइम-टेबल जारी

रायपुर से रावघाट तक मेमू ट्रेन के संचालन के लिए रेलवे बोर्ड द्वारा टाइम-टेबल भी जारी किया जा चुका है और अब केवल ट्रेन के हरी झंडी मिलने का इंतजार है। इस रूट पर 12 अक्टूबर से नई ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जानी थी, लेकिन रेल मंत्री का दौरा रद होने के कारण इसमें कुछ और समय लग सकता है। रावघाट तक ट्रेन पहुंचने से इस पूरे सुदूर वनांचल क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।

सुरक्षा के कड़े पहरे में निर्माण

बस्तर के सुदूर और नक्सल प्रभावित वनांचल में रेल मार्ग का विस्तार करना प्रशासनिक, तकनीकी और सुरक्षात्मक- हर मोर्चे पर चुनौती रही है। प्रथम चरण के तहत दल्लीराजहरा से रावघाट तक ट्रैक बिछाना सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील कार्य था। उग्रवाद प्रभावित और घने जंगलों वाले इस इलाके में निर्माण कार्यों को सुरक्षित रूप से पूरा करने के लिए असाधारण कदम उठाने पड़े।

निर्माण कार्य में जुटे श्रमिकों और इंजीनियरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रैक के दोनों ओर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे रेल मार्ग पर लगभग हर पांच किलोमीटर की दूरी पर बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के स्थायी कैंप स्थापित किए गए, जिनके कड़े पहरे और सुरक्षा कवर के साए में ही यह चुनौतीपूर्ण रेलवे परियोजना ज़मीन पर उतर सकी।

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एक नजर में परियोजना का सफर

  • 1955 से रायपुर से जगदलपुर को रेल लाइन से जोड़ने की मांग लगातार की जा रही थी।
  • 1993 में अविभाजित मध्य प्रदेश के समय योजना आयोग ने इसकी मंजूरी दी थी, जिसके बाद यह योजना लंबे समय तक ठंडे बस्ते में चली गई थी। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद इस दिशा में प्रशासनिक गंभीरता दिखाई दी।
  • 24 दिसंबर 2007 को एनएमडीसी (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम) सेल, छत्तीसगढ़ सरकार और रेलवे के बीच इसके लिए त्रिपक्षीय/संयुक्त समझौता हुआ था। इसके तहत दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर तक कुल 235 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके पहले चरण में दल्लीराजहरा से रावघाट और दूसरे चरण में रावघाट से जगदलपुर (140 किमी) तक काम तय किया गया था।
  • 03 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगदलपुर की सभा में ताड़ोकी से रेल सेवा का शुभारंभ किया था, और अब यह ट्रेन रावघाट तक विस्तार पा रही है।