
अखिल शर्मा, नईदुनिया, रायपुर। प्रदेश में युवाओं के सामने चुनौती केवल रोजगार पाने की नहीं, बल्कि नियमित आय और सामाजिक सुरक्षा वाला काम हासिल करने की भी है। यूथपावर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 81.8 लाख युवाओं में यह आंकलन किया गया है। इनमें काम कर रहे युवाओं में करीब 20 प्रतिशत ही नियमित वेतन वाली नौकरी में हैं, जबकि 87.8 प्रतिशत युवा श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है।
वहीं, करीब 88 प्रतिशत वेतनभोगी युवा श्रमिकों के पास लिखित अनुबंध नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता और स्थायित्व पर भी ध्यान देना जरूरी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 61.4 प्रतिशत युवा श्रमबल में शामिल हैं। इनमें रोजगार में लगे और काम की तलाश कर रहे, दोनों तरह के युवा शामिल हैं। इस आयु वर्ग में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत है। वहीं, 15.7 प्रतिशत युवा ऐसे हैं, जो न पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही कोई प्रशिक्षण ले रहे हैं। हालांकि, इस श्रेणी में शामिल सभी युवा नौकरी की तलाश में हों, यह जरूरी नहीं है।
काम कर रहे युवाओं में करीब 61.7 प्रतिशत स्वरोजगार से जुड़े हैं, जबकि 19.4 प्रतिशत आकस्मिक या दिहाड़ी आधारित काम करते हैं। नियमित वेतन वाली नौकरी करने वालों की हिस्सेदारी करीब 18.9 प्रतिशत है। रिपोर्ट के कुछ हिस्सों में यह अनुपात 20.2 प्रतिशत के आसपास बताया गया है। स्वरोजगार में छोटे कारोबार और पारिवारिक उद्यम भी शामिल हैं, जहां आय नियमित होना जरूरी नहीं है। वहीं, दिहाड़ी श्रमिकों की कमाई काम मिलने और काम के दिनों पर निर्भर करती है।
रोजगार में लगे युवाओं में करीब 52 प्रतिशत कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं। निर्माण क्षेत्र में 14 प्रतिशत, व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र में 12 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र में लगभग सात प्रतिशत युवा काम कर रहे हैं। रिपोर्ट में प्रदेश के पंजीकृत कारखानों में करीब तीन लाख लोगों के रोजगार तथा लगभग 13.8 लाख अनौपचारिक उद्यमों का उल्लेख है। इससे प्रदेश में छोटे और अनौपचारिक कारोबारों की बड़ी भूमिका सामने आती है। रोजगार का बड़ा हिस्सा कृषि और छोटे उद्यमों में होने से नियमित वेतन वाली नौकरियों के अवसर सीमित हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, नियमित वेतन वाली नौकरी करने वाले युवाओं की औसत मासिक कमाई करीब 6,651 रुपये है। कृषि क्षेत्र में यह 5,671 रुपये, निर्माण में 5,301 रुपये और विनिर्माण में 5,773 रुपये है। व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र में औसत मासिक कमाई करीब 7,339 रुपये बताई गई है। ये आंकड़े संबंधित क्षेत्रों में युवाओं की औसत कमाई दर्शाते हैं, इन्हें सभी कर्मचारियों का वेतन या न्यूनतम मजदूरी नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट में 87.8 प्रतिशत युवा श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिलने की बात कही गई है। वहीं, करीब 88 प्रतिशत वेतनभोगी युवा श्रमिकों के पास लिखित अनुबंध नहीं है। इससे वेतन, काम के घंटे और नौकरी की शर्तों को लेकर असुरक्षा बढ़ सकती है। सामाजिक सुरक्षा में भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य संबंधी लाभ शामिल हो सकते हैं। कौशल विकास के स्तर पर करीब 49.9 प्रतिशत युवाओं ने किसी न किसी रूप में व्यावसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण लिया है, लेकिन औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं की हिस्सेदारी केवल 1.8 प्रतिशत है।
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