
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। पेपर लीक मामले में पुलिस की जांच में कई राजफाश हुए हैं। प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया ने मार्केट से एक एंडोस्कोपिक कैमरा लिया। फिर उत्तरपुस्तिका जमा करने के दौरान उसे जो पेपर मिला उसे घर ले आया। लिफाफे में एक छेद कर के उस कैमरे को लिफाफे में डालकर पेपर स्कैन कर उसका वीडियो बना लिया। पहले सात अगस्त को पैथोलाजी के पेपर के प्रश्न उसने छात्र अजय नायक और अन्य दो छात्रों को दिए।
चूंकि उस समय छात्र सीमित थे इसलिए पेपर लीक नहीं हो पाया। फिर 20 अगस्त को होने वाले पेपर को प्रोफेसर ने छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को 11 हजार रुपये में दिया। अजय नायक ने प्रश्नपत्र की सामग्री त्रिदेव पटेल, नितिन पांडेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुंचाई। मोबाइल से प्रश्नपत्र की सामग्री एक-दूसरे तक पहुंचती गई और परीक्षा से पहले इसके कुछ प्रश्न सोशल मीडिया में वायरल हो गए।
प्रश्नपत्र वायरल होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इसके प्रसार की कड़ी खंगालनी शुरू की। जांच के दौरान दुर्ग निवासी अनुज मिंज की भूमिका सामने आई। पुलिस टीम ने उसे पकड़ा और पूछताछ की। इसके बाद कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के जिलों में 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की अलग-अलग टीमें भेजी गईं। पुलिस के मुताबिक करीब 36 घंटे की जांच के बाद प्रश्नपत्र लीक के स्रोत और इसमें शामिल आरोपितों की पहचान कर ली गई।
मामले में पुलिस ने प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया के अलावा अजय नायक (20), त्रिदेव पटेल (22), नितिन पांडेय (22), अनुज मिंज (22) और आदित्य साहू (20) को गिरफ्तार किया। वहीं दो अन्य आरोपित फरार हैं। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र की सामग्री कितने लोगों तक पहुंची और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
पुलिस ने आरोपितों से 11 हजार रुपये, छह मोबाइल, वीडियो रिकार्डिंग उपकरण, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सूजा, कापी और फेविकोल बरामद किया है। पुलिस के अनुसार बरामद सामान में प्रश्नपत्र की रिकार्डिंग और उसे आगे पहुंचाने की प्रक्रिया से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 20 अगस्त को होने वाली एजीसीएच-221 की परीक्षा निरस्त कर दी। परीक्षा में प्रदेश के कृषि महाविद्यालयों के करीब 1,200 विद्यार्थी शामिल होने वाले थे। अब यह परीक्षा सितंबर के प्रथम सप्ताह में होगी। परीक्षा की गोपनीयता भंग होने से विद्यार्थियों की तैयारी और परीक्षा कार्यक्रम प्रभावित हुआ है।
पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र मिलने के बाद उसकी सामग्री किन-किन लोगों तक पहुंची और सोशल मीडिया पर वायरल होने से पहले कितने छात्रों के पास इसकी जानकारी पहुंच चुकी थी। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस के अनुसार योगेश वर्ष 2019 से भारती एग्रीकल्चर कालेज में प्रोफेसर है। पिछले एक वर्ष से वह उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त कर उन्हें कालेज तक पहुंचाने का काम करता था। 17 अगस्त को वह जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय से आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लेकर घर गया।
पुलिस का दावा है कि उसने लिफाफे की सील से छेड़छाड़ किए बिना उसमें सूक्ष्म छेद कर एंडोस्कोपिक कैमरा अंदर डाला और प्रश्नपत्र की वीडियो रिकार्डिंग कर ली। इसके बाद वीडियो देखकर हाथ से प्रश्नपत्र लिखकर छात्रों तक पहुंचाया। एक छात्र अजय ने प्रश्नपत्र की सामग्री कई छात्रों तक पहुंचाई। इसके बाद प्रश्नपत्र इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हो गए।
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20 अगस्त को सुबह 10 बजे से एजीसीएच-221 की परीक्षा होनी थी। परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले सुबह 8:41 बजे कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल पर प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिली। 8:54 बजे संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई। छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने वाट्सएप पर प्रश्नपत्र के कुछ प्रश्न प्रसारित होने की सूचना दी। पुष्टि के बाद वरिष्ठ विज्ञानी एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. एनआर रंगारे की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में अपराध दर्ज किया गया।
मामले में मुख्य आरोपित सहित छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच जारी है और जो भी लोग संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री
जांच में प्रश्नपत्र लीक करने और उसे छात्रों तक पहुंचाने में प्रोफेसर की भूमिका सामने आई है। छह आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि दो की तलाश जारी है। आरोपितों से पूछताछ कर प्रश्नपत्र लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।- तारकेश्वर पटेल, डीसीपी, सेंट्रल जोन, रायपुर।