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छत्तीसगढ़ में सिजेरियन डिलीवरी और कई जरूरी गायनी इलाज आयुष्मान योजना के दायरे से बाहर

महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बात लगातार हो रही है, लेकिन इलाज के मोर्चे पर आयुष्मान योजना में महिलाओं के लिए कई जरूरी सुविधाओं की कमी स...और पढ़ें

By Akhil Kumar SharmaEdited By: manoj dubey
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 01:44:27 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 01:45:52 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में सिजेरियन डिलीवरी और कई जरूरी गायनी इलाज आयुष्मान योजना के दायरे से बाहर

HighLights

  1. उपचार कराने पर अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है
  2. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी परेशानी
  3. सर्वाइकल कैंसर की जांच और दूसरी सर्जरी भी नहीं

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बात लगातार हो रही है, लेकिन इलाज के मोर्चे पर आयुष्मान योजना में महिलाओं के लिए कई जरूरी सुविधाओं की कमी सामने आ रही है। खासकर निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से महिलाओं के प्रसव और गायनिक उपचार नहीं हो रहे हैं।

इनमें सिजेरियन डिलीवरी, गर्भाशय निकालने के कई तरह के ऑपरेशन, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब की सर्जरी, एमटीपी, सर्वाइकल कैंसर की जांच सहित कई उपचार शामिल हैं।

उपचार कराने पर अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है

स्थिति यह है कि आयुष्मान कार्ड लेकर निजी अस्पताल पहुंचने वाली महिला को यदि इनमें से किसी उपचार की जरूरत है तो उसे योजना का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में मरीज को सरकारी अस्पताल भेजा जाता है या निजी अस्पताल में उपचार कराने पर अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है।


आयुष्मान से सिजेरियन डिलीवरी का इलाज नहीं हो रहा

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति इलाज के साथ अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी पैदा करती है।मां बनने के दौरान भी योजना की सीमा गर्भावस्था और प्रसव महिलाओं के स्वास्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इसके बावजूद निजी अस्पतालों में आयुष्मान से सिजेरियन डिलीवरी का इलाज नहीं हो रहा है।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी परेशानी

सामान्य प्रसव, ब्रीच डिलीवरी, वैक्यूम और फोरसेप डिलीवरी जैसी प्रसव संबंधी सुविधाओं का भी निजी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में गर्भवती आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बड़ी परेशानी बन सकती है।

गर्भाशय की बीमारी में भी विकल्प सीमित महिलाओं में गर्भाशय की बीमारी के उपचार के लिए कई तरह की सर्जरी की जरूरत पड़ती है। निजी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत इनका लाभ नहीं मिल रहा है। इनमें एब्डामिनल हिस्टेरेक्टामी, एब्डामिनल हिस्टेरेक्टामी के साथ साल्पिंगो-ओफोरेक्टामी, लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टामी (टीएलएच), लैप्रोस्कोपिकली असिस्टेड वेजाइनल हिस्टेरेक्टामी (एलएवीएच), नान-डिसेंट वेजाइनल हिस्टेरेक्टामी तथा एंटीरियर और पोस्टीरियर रिपेयर के साथ वेजाइनल हिस्टेरेक्टामी शामिल हैं।

सर्वाइकल कैंसर की जांच और दूसरी सर्जरी भी नहीं

इसी तरह लैप्रोस्कोपिक साल्पिंगो-ओफोरेक्टामी और दोनों अंडाशय व फैलोपियन ट्यूब की सर्जरी भी निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना से नहीं हो रही है। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए पीएपी और कोल्पोस्कोपी जैसी जांच भी निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा वैजाइनोप्लास्टी (मैकइंडो प्रक्रिया), सिस्टोसील के लिए एंटीरियर रिपेयर और वुल्वो-वैजाइनल सिस्ट के उपचार जैसी प्रक्रियाएं भी निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से नहीं हो रही हैं।

निजी अस्पतालों में इनका खर्च भी कार्ड से कवर नहीं हो रहा

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) के लिए भी निजी अस्पतालों में आयुष्मान का लाभ नहीं मिल रहा है। आठ सप्ताह तक, आठ से 12 सप्ताह और 12 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था के लिए अलग-अलग उपचार की जरूरत हो सकती है, लेकिन निजी अस्पतालों में इनका खर्च भी कार्ड से कवर नहीं हो रहा है।

बीमारी के समय सरकारी अस्पताल ही विकल्प

महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सुविधा का मतलब केवल सामान्य जांच या दवाइयां नहीं हैं। प्रसव, गर्भाशय की बीमारी, अंडाशय संबंधी समस्या, कैंसर की जांच और अन्य गायनी सर्जरी भी उतनी ही जरूरी हैं। निजी अस्पतालों में इन उपचारों का आयुष्मान योजना से बाहर होना योजना की पहुंच को सीमित करता है। इसका असर खासकर उन महिलाओं पर पड़ता है, जो इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड पर निर्भर हैं।

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