
डिजिटल डेस्क, रायपुर/राजनांदगांव। विजयादशमी (दशहरा) के अवसर पर शस्त्र पूजन के दौरान AK-47 राइफल से हवाई फायरिंग करने का वीडियो वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक (SP) अंकिता शर्मा को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किया है। इस घटना ने पुलिस बल में सुरक्षा नियमों, अनुशासन और हथियार संभालने के प्रोटोकॉल को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
20 अक्टूबर को विजयादशमी के मौके पर राजनांदगांव के पुलिस लाइन्स में पारंपरिक 'शस्त्र पूजा' का आयोजन किया गया था। इस दौरान साड़ी पहने हुए SP अंकिता शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वे AK-47 राइफल से लगातार कई राउंड हवाई फायरिंग करती नजर आ रही हैं।
राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अजय यादव ने बताया कि पुलिस मुख्यालय ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। मुख्यालय का मानना है कि यह कृत्य पुलिस के हथियार संचालन नियमों के अनुकूल नहीं है, इसलिए SP से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
IG ने कहा, "मुख्यालय ने माना है कि सोशल मीडिया पर आ रही नकारात्मक टिप्पणियों से पुलिस बल की गरिमा को ठेस पहुंची है। SP का जवाब मिलने के बाद मैं अपनी टिप्पणी के साथ रिपोर्ट मुख्यालय भेजूंगा, जहां से आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।"
विवाद केवल SP अंकिता शर्मा तक सीमित नहीं है। एक अन्य वीडियो में राजनांदगांव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) कीर्तन राठौर भी उनके बाद AK-47 से फायरिंग करते दिखे। इसके अलावा रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर समेत राज्य के कई अन्य जिलों में भी शस्त्र पूजा के बाद पुलिसकर्मियों द्वारा हथियार चलाने के वीडियो सामने आए हैं।
घटना के बाद कई पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है...
पूर्व IPS अधिकारी आर. के. विज: उन्होंने कहा कि परंपरा केवल हथियारों की पूजा करने की है, न कि उन्हें चलाने की। इस तरह की फायरिंग से दुर्घटनाओं का खतरा रहता है और इससे बचा जाना चाहिए।
पूर्व थलसेना अधिकारी K J S ढिल्लों (लेफ्टिनेंट जनरल): उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोड किए गए हथियार को लापरवाही से संभालना खतरनाक है। इसमें सुरक्षा के सभी नियमों का उल्लंघन किया गया - जैसे हथियार को हर दिशा में घुमाना, गैर-प्रमाणित परिधान (साड़ी) में सर्विस वेपन चलाना और बुनियादी ड्रिल का पालन न करना। इससे किसी की जान भी जा सकती थी।
पूर्व कर्नल दीपक कुमार: उन्होंने इस कृत्य को लापरवाह और गैर-पेशेवर बताया।
नाम न छापने की शर्त पर एक IPS अधिकारी: उन्होंने स्पष्ट किया कि शस्त्र पूजा के दौरान अगर फायरिंग की भी जाती है, तो केवल ब्लैंक कारतूस ('आवाजी कारतूस') का इस्तेमाल होता है, न कि लाइव एम्यूनिशन (जिंदा कारतूस) का। हवा में दागी गई गोली भी नीचे आकर किसी को घायल कर सकती है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं...
विरोध में: अधिकांश यूजर्स ने इसे सुरक्षा प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन बताया और केवल ब्लैंक कारतूसों के इस्तेमाल की सलाह दी।
समर्थन में: 'पूर्व मेजर एल. एस. चौधरी' नाम के एक यूजर ने माना कि हथियार संभालने में कमियां थीं, लेकिन उनका तर्क था कि इस एक घटना से अधिकारी के पिछले बेहतरीन कार्यों को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। वहीं, नरेंद्र नेगी नामक यूजर ने कहा कि आलोचना का एक कारण उनका साड़ी पहनकर राइफल चलाना भी हो सकता है, जबकि वे एक प्रशिक्षित अधिकारी हैं।