
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। प्रदेश की एकमात्र शासकीय खाद्य जांच लैब तैयार होने के बावजूद पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच का काम अधूरा है। करीब 25 साल बाद भी प्रदेश में लगभग 30 फीसदी खाद्य पदार्थों के सैंपलों की जांच नहीं हो पा रही है। लैब में फूड टेस्टिंग एनालिस्ट का केवल एक पद भरा है। यह कर्मचारी लैब टेक्नीशियन के पद से पदोन्नत हुआ है, जबकि कम से कम पांच एनालिस्ट की जरूरत बताई गई है।
तकनीकी कर्मचारियों की स्थिति भी कमजोर है। वर्तमान में केवल दो लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं। उधर, रायपुर की ड्रग टेस्टिंग लैब में स्वीकृत 64 पदों में से 43 खाली हैं। स्टाफ की कमी के कारण जांच व्यवस्था और मान्यता, दोनों प्रभावित हुए हैं।
ऐसे नमूने जांच के लिए पुणे या कोलकाता भेजने पड़ते हैं। लैब में जांच की मशीनें स्थापित हो चुकी हैं, लेकिन विशेषज्ञों और तकनीकी कर्मचारियों की कमी सुविधाओं का पूरा लाभ मिलने में बाधा बनी हुई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने प्रदेश की लैब को सीमित श्रेणियों में जांच की मान्यता दी है। इनमें अनाज व उससे बने उत्पाद, नमक, मसाले, वनस्पति, तेल-वसा और डेयरी उत्पाद शामिल हैं। माइक्रोबायोलॉजी लैब में भी जांच का दायरा सीमित है। वहीं, झारखंड, महाराष्ट्र और ओडिशा की शासकीय लैब में करीब 90 प्रकार के खाद्य पदार्थों की जांच की सुविधा है।
खाद्य एवं औषधि विभाग की तरफ से विभिन्न प्रतिष्ठानों, होटल, रेस्टोरेंट, दुकानों में छापेमारी कार्रवाई की जाती है, उसके बाद वहां से सैंपल एकत्र किया जाता है। उन्हें जांच के लिए रायपुर स्थित खाद्य एवं औषधि विभाग भेजा जाता है, जहां पूरे प्रदेश से सैंपल आते हैं। एक अनुमान के मुताबिक साल में लगभग दो से ढाई हजार सैंपल जांच के लिए रायपुर पहुंचते हैं। हाल यह है कि एक-एक तकनीशियन के पास जांच के लिए एक समय में 50 तक सैंपल हो जाते हैं। इससे जांच का काम प्रभावित होता है और रिपोर्ट आने में देरी भी होती है।
प्रदेश भर से जांच के लिए खाद्य सामग्री रायपुर पहुंचती है। रिपोर्ट आने में 15 दिन से एक महीने लग जाते हैं। तब तक प्रतिष्ठान संबंधित खाद्य सामग्री की बिक्री कर चुके होते हैं। यदि जांच के बाद रिपोर्ट में मिलावट नहीं पाई गई तो ठीक है, लेकिन रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है तो इसके दुष्परिणाम कहीं न कहीं उन ग्राहकों को भुगतना पड़ता है जो यह मिलावटी सामान खाकर बीमार होते हैं।
इसलिए विभाग मिलावटखोरों पर लगाम कसने में अब तक नाकाम रहा है। मिलावट को लेकर आज तक किसी भी प्रतिष्ठान के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। इसलिए प्रदेश में धड़ल्ले से मिलावट का कारोबार चल रहा है।
सरकारी लैब में राज्य भर से महीने में लगभग तीन सौ सैंपल जांच के लिए आते हैं। त्योहार के समय लैब में जांच के लिए आने वाले सैंपलों की संख्या दोगुनी तक बढ़ जाती है। पिछले साल दिवाली के समय जांच के लिए करीब 800 सैंपल पहुंचे थे। प्रदेश की एकमात्र लैब में मैनपावर के नाम पर कुल मिलाकर छह तकनीशियन और अधिकारी हैं। इनके भरोसे ही लैब का सारा काम होता है।
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