छत्तीसगढ़ में 1 हजार किमी लंबे धार्मिक कॉरिडोर का होगा विकास! डोंगरगढ़ समेत 5 प्रमुख धाम होंगे शामिल
राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और उत्तराखंड के चार धाम की तर्ज पर एक मजबूत आध्यात्मिक नेटवर्क स्थापित करने के लिए 'शक्तिपीठ परियोजना' की शुरु...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 03:18:54 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 03:18:54 PM (IST)
धार्मिक कॉरिडोर का होगा विकास (सांकेतिक तस्वीर)HighLights
- ₹5 करोड़ के बजट से बनेगा 1,000 किमी लंबा शक्तिपीठ कॉरिडोर
- डोंगरगढ़, रतनपुर, दंतेवाड़ा समेत 5 प्रमुख धाम होंगे शामिल
- श्रद्धालुओं के लिए रोप-वे, पार्किंग व आधुनिक सुविधाएं होंगी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और उत्तराखंड के चार धाम की तर्ज पर एक मजबूत आध्यात्मिक नेटवर्क स्थापित करने के लिए 'शक्तिपीठ परियोजना' की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत लगभग 1,000 किलोमीटर लंबे धार्मिक कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है।
इसके माध्यम से राज्य के पांच प्रमुख शक्तिपीठों में कुदरगढ़, डोंगरगढ़, रतनपुर, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा को एक ही सर्किट से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस योजना के लिए बजट में पांच करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है, जिससे इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का तीव्र विकास हो रहा है।
पांचों प्रमुख शक्तिपीठों की विशेषताएं और इतिहास
- मां बम्लेश्वरी मंदिर (डोंगरगढ़): राजनांदगांव जिले में लगभग 1600 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर करीब 2,200 वर्ष पुराना है। यह देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए अगाध आस्था का केंद्र है।
- मां महामाया मंदिर (रतनपुर): बिलासपुर जिले में स्थित यह ऐतिहासिक सिद्ध शक्तिपीठ 1050 ईस्वी में कलचुरी राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा स्थापित की गई थी। माँ की दुर्लभ दोहरी प्रतिमा विराजमान है।
- मां दंतेश्वरी मंदिर (दंतेवाड़ा): बस्तर अंचल में शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर जनजातीय परंपरा और सनातन आस्था का अनूठा प्रतीक है। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा का यह प्रमुख केंद्र है।
- बागेश्वरी मंदिर (कुदरगढ़): सूरजपुर जिले के ओडगी में लगभग 1500 फीट ऊंचे पहाड़ों पर स्थित यह मंदिर शक्ति एवं साहस का प्रतीक माना जाता है, जहां नवरात्रि पर विशेष अनुष्ठान होते हैं।
- मां चंद्रहासिनी मंदिर (चंद्रपुर): सक्ती जिले में महानदी और मांड नदी के संगम के पास स्थित यह शक्तिपीठ प्राचीन कलाकृति और गहरी लोक-आस्था के लिए प्रसिद्ध है।
आधुनिक सुविधाएं और पर्यटन को बढ़ावा
इन सभी शक्तिपीठों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क संपर्क, विश्राम गृह, पेयजल, आधुनिक शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, सीसीटीवी कैमरे और रोप-वे जैसी आधुनिक अवस्थापना सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही, केंद्र सरकार की 'प्रसाद' योजना के तहत रतनपुर और दंतेवाड़ा जैसे प्रमुख स्थलों के समग्र विकास के लिए वृहद कार्ययोजनाएं भी तैयार की गई हैं। इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में संवहनीय पर्यटन को बल मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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