
राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी के चलते खासकर पीक आवर्स में ग्रामीण इलाकों और औद्योगिक क्षेत्र में बिजली कटौती करना पड़ रहा है। बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच एक हजार से 1,500 मेगावाट तक का अंतर आ रहा है।
इस मांग को पूरा करने के लिए बिजली कंपनी को अब महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा से बिजली खरीदनी पड़ रही है।
राज्य में करीब दो दशक बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रदेश में बिजली की कमी दूर करने के लिए लगातार खरीद की स्थिति बनी है। अक्टूबर माह में पहली बार उपजे इस बिजली संकट के पीछे तापमान का बढ़ना और कृषि कार्यों के लिए बिजली की खपत में हुआ इजाफा मुख्य कारण रहा है।
छत्तीसगढ़ अब तक बिजली के मामले में सरप्लस राज्य की श्रेणी में रहा है, लेकिन इस अक्टूबर में पहली बार उसे बिजली खरीदने की नौबत का सामना करना पड़ा है। बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, पहले गर्मियों में सुबह के समय थोड़ी कमी होने पर सरप्लस राज्यों से बिजली लेकर आपूर्ति कर ली जाती थी, और सर्दियों में जब जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों को जरूरत पड़ती थी, तब छत्तीसगढ़ उन्हें बिजली उपलब्ध कराता था।
लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। इतना ही नहीं, देश के अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी बिजली की उपलब्धता को लेकर भारी दबाव बना हुआ है। इन तमाम राज्यों ने अपनी मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है।
बढ़ती गर्मी और कृषि क्षेत्र में सिंचाई की आवश्यकता के कारण बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों के मुताबिक सितंबर 2026 में भारत में बिजली की कमी बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे यानी करीब 56 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी, जिससे देश की पूरी बिजली व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।
राज्य में पीक आवर्स के दौरान बिजली की मांग बढ़कर 6,500 से 6,800 मेगावाट तक पहुंच गई है, जबकि वर्तमान में केवल करीब 5,500 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध हो पा रही है। आने वाले दिनों में मौसम ठंडा होगा और फसल कट जाएगी तब स्थिति सामान्य रहने से बिजली कटौती की नौबत नहीं आएगी।
-भीम सिंह कंवर,एमडी,बिजली वितरण कंपनी।
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