• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर

छत्तीसगढ़ में बिजली मरम्मत व्यवस्था निजी हाथों में देने की तैयारी; 1,200 करोड़ का टेंडर जारी, रोजगार पर संकट की आशंका

कंपनी ने फ्यूज ऑफ कॉल, वार्षिक रखरखाव और 11 केवी व 33 केवी नेटवर्क के ब्रेकडाउन मेंटेनेंस के लिए करीब 1,200 करोड़ रुपये का ई-टेंडर जारी किया है।

By Satish PandeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 09:30:35 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 09:30:35 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में बिजली मरम्मत व्यवस्था निजी हाथों में देने की तैयारी; 1,200 करोड़ का टेंडर जारी, रोजगार पर संकट की आशंका
छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी के टेंडर पर उठे सवाल।

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी के टेंडर पर उठे सवाल
  2. 300 गाड़ियों के अनुभव की शर्त पर खड़ा हुआ विवाद
  3. टाटा पावर को लाइसेंस और ₹1200 करोड़ के टेंडर का विरोध

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य बिजली वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) की बिजली मरम्मत व्यवस्था को निजी कंपनी के हवाले करने की तैयारी हैं। कंपनी ने फ्यूज ऑफ कॉल, वार्षिक रखरखाव और 11 केवी व 33 केवी नेटवर्क के ब्रेकडाउन मेंटेनेंस के लिए करीब 1,200 करोड़ रुपये का ई-टेंडर जारी किया है।

आरोप है कि इस व्यवस्था में राज्य के बाहर की निजी कंपनी को करीब 300 करोड़ रुपये प्रशासनिक शुल्क के रूप में मिलेंगे। इससे स्थानीय ठेकेदारों के रोजगार पर संकट की आशंका जताई जा रही है।

300 गाड़ियों के अनुभव की शर्त पर सवाल

टेंडर में 300 गाड़ियों के अनुभव की शर्त रखी गई है। संबंधित बड़ी कंपनियों के पास अपने नाम पर इतनी गाड़ियां नहीं हैं। ऐसे में किराये की गाड़ियों और पेटी ठेकेदारों के सहारे टेंडर की शर्तें पूरी करने का रास्ता खुल सकता है। राज्य में करीब 70 डिवीजन, 132 सबडिवीजन और 350 वितरण केंद्र हैं। व्यवस्था के संचालन के लिए लगभग 600 गाड़ियों की जरूरत बताई जा रही है।


वहीं, टेंडर में सब स्टेशनों की निगरानी और रखरखाव शामिल है या नहीं, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश में करीब 1,600 सब स्टेशन और उनसे जुड़ी 11 व 33 केवी लाइनें हैं। संबंधित 25 ठेकेदारों के माध्यम से संचालित इस व्यवस्था में सभी लाइनों का रखरखाव एक निजी कंपनी के जरिए कैसे संभव होगा, यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

श्रम अनुज्ञा और कर्मचारियों के भुगतान की चिंता

विद्युत ठेकेदार संघ के महासचिव जीके शाह, डीके साहू का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में श्रम अनुज्ञा, भविष्य निधि (पीएफ) और इएसआइसी से जुड़ी शर्तों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि ठेका लेने वाली बाहर की कंपनी काम छोड़कर चली गई तो हजारों कर्मचारियों के वेतन और सामाजिक सुरक्षा का संकट खड़ा हो सकता है। पहले भी कुछ कंपनियों के काम छोड़ने से कर्मचारियों का भुगतान अटका है।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ के 4 शहरों में दौड़ेंगी 240 इलेक्ट्रिक बसें, रायपुर को 100, बिलासपुर-भिलाई को 50-50 और कोरबा को मिलेंगी 40 ई-बसें

वर्तमान व्यवस्था में बिजली कंपनी में करीब 300 वाहन ठेकेदार और 122 मैनपावर ठेकेदार जुड़े हैं। जब मरम्मत का काम स्थानीय कर्मचारियों और संसाधनों से ही कराया जाना है, तो बीच में राज्य से बाहर की बड़ी कंपनी को शामिल कर अतिरिक्त प्रशासनिक खर्च बढ़ाने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि इससे रखरखाव प्रभावित होने के साथ तकनीकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

निजीकरण के खिलाफ अभियंता और कांग्रेसी लामबंद

बिजली वितरण के निजीकरण और टाटा पावर को लाइसेंस देने के प्रस्ताव के विरोध में विद्युत अभियंता लामबंद हैं। उनका कहना है कि इससे कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।वहीं,कांग्रेस ने भी रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण की अनुमति देने के प्रस्ताव का विरोध कर इसके खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी की है।