
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। प्रदेश के मेडिकल कालेजों के पीजी (स्नातकोत्तर) डाक्टरों को दूसरे राज्यों की तुलना में कम स्टाइपेंड मिलने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। विगत दो वर्ष से अधिक समय से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी नहीं होने से डाक्टरों ने अब आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। शुक्रवार को सभी मेडिकल कालेजों में डीन को 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, सभी मंत्रियों, स्थानीय विधायकों और कलेक्टरों को देने की तैयारी है।
15 दिनों में मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की योजना है। वर्तमान में प्रदेश के पीजी डाक्टरों को 67,500 से 74,600 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। वहीं, दिल्ली में 1,32,336 रुपये, बिहार में 1,29,962 रुपये, उत्तर प्रदेश में 1,06,380 रुपये, गुजरात में 1,00,800 रुपये, हरियाणा में 1,00,980 रुपये और महाराष्ट्र में 92,470 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। पीजी डाक्टरों का कहना है कि समान स्तर की जिम्मेदारियां और कार्यदबाव होने के बावजूद दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
अस्पतालों में लंबी ड्यूटी, लगातार बढ़ते कार्यदबाव और मरीजों की देखभाल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के बावजूद आर्थिक रूप से पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। डाक्टरों ने स्टाइपेंड व अन्य मांगों को लेकर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था। विगत छह माह से डाक्टर चरबद्ध तरीके से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
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रेजिडेंट डाक्टर अस्पताल प्रणाली की रीढ़ हैं। वे न केवल चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान करते हैं, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में भी अग्रिम पंक्ति में रहकर कार्य करते हैं। इसके बावजूद, पारिश्रमिक राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कम है। शुक्रवार से ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी। 15 दिनों में मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। डा. रेशम रत्नाकर, प्रदेशाध्यक्ष, जेडीए।
छत्तीसगढ़ - 67,500 - 45,000
दिल्ली- 1,32,336 - 76,000
बिहार- 1,29,962 - 45,000
उत्तर प्रदेश- 1,06,380 - 42,000
गुजरात- 1,00,800 - 50,000
हरियाणा- 1,00,980 - 53,000
महाराष्ट्र - 92,470 - 50,000
(स्रोत - जेडीए के अनुसार, स्टाइपेंड रुपये में)।